घुईसरनाथ धाम, लालगंज, प्रतापगढ़
(Ghuisarnath Dham, Lalganj, Pratapgarh)

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🔱 प्राचीन शिव तीर्थ | सई तटवर्ती ज्योतिर्लिंग धाम

बाबा घुइसरनाथ धाम (प्रतापगढ़): सई नदी के तट पर स्थित जागृत शिव सिद्धपीठ, सस्पेंशन ब्रिज और 'घुश्मेश्वर' की पावन महिमा

भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सई नदी की कल-कल धारा, प्राकृतिक हरियाली, भव्य झूला पुल और बाबा भोलेनाथ की अलौकिक कृपा का संपूर्ण आध्यात्मिक यात्रा-वृत्तांत।

🌟 धाम संक्षिप्त परिचय (Quick Facts)
तीर्थ का नाम:
बाबा घुइसरनाथ धाम (Baba Ghuisarnath)
भौगोलिक स्थिति:
सांगीपुर ब्लॉक, लालगंज अझरा के समीप, सई नदी तट, प्रतापगढ़
दूरी:
लालगंज कस्बे से 10 किमी | प्रतापगढ़ मुख्यालय से 35-40 किमी
पौराणिक मान्यता:
शिवपुराण वर्णित घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग / घुइसुर दैत्य व चरवाहा भक्ति
रामायण कालीन संबंध:
प्रभु श्रीराम द्वारा वनवास काल में सई तट पर शिवलिंग पूजन
विशेष आकर्षण:
सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल), सई नदी घाट, प्राकृतिक वन वाटिका
प्रमुख उत्सव व मेले:
राष्ट्रीय घुइसरनाथ महोत्सव (महाशिवरात्रि) एवं सावन मेला
दर्शन समय:
प्रातः 04:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक (वर्ष पर्यन्त)
निकटतम रेलवे स्टेशन:
लालगंज, अंतू एवं माँ बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में सई नदी के सुरम्य कछार पर स्थित भगवान आशुतोष का अत्यंत प्राचीन तीर्थ 'बाबा घुइसरनाथ धाम' (Ghuisarnath Dham) अध्यात्म, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। यदि आप रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर मन की असीम शांति और महादेव की साक्षात कृपा की अनुभूति चाहते हैं, तो यह पावन तीर्थ आपकी यात्रा सूची में सर्वोपरि होना चाहिए।

सई नदी के किनारे विस्तृत हरे-भरे पेड़ों की छांव, प्राचीन बलुआ पत्थर से निर्मित गर्भगृह की दिव्य गूंज और नदी पर हाल ही में निर्मित भव्य सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल) यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु और पर्यटक के मन को मोह लेता है।

🌺 पौराणिक कथाएं: घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग और घुइसरनाथ का रहस्य

बाबा घुइसरनाथ धाम की उत्पत्ति को लेकर शिवपुराण और स्थानीय लोक-श्रुतियों में अत्यंत प्रेरणादायक कथाएं मिलती हैं:

🔱 1. शिवपुराण और माता घुश्मा की अनन्य भक्ति

शिवपुराण के कोटिरुद्र संहिता के अनुसार, सुधर्मा नामक ब्राह्मण की धर्मपत्नी घुश्मा (Ghushma) भगवान शिव की परम भक्त थीं। वे प्रतिदिन 101 पार्थिव शिवलिंग बनाकर सरोवर/सई नदी में विसर्जित करती थीं। जब ईर्ष्यावश उनकी सौत ने उनके इकलौते पुत्र की हत्या कर उसी जल में फेंक दिया, तब भी घुश्मा की शिव-आराधना नहीं रुकी। उनकी निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए, मृत पुत्र को जीवित किया और घुश्मा के अनुरोध पर लोक-कल्याण हेतु वहीं 'घुश्मेश्वर' रूप में प्रतिष्ठित हो गए। स्थानीय अवधी बोली में यही 'घुश्मेश्वर' कालांतर में 'घुइसरनाथ' के नाम से विख्यात हुआ।

🏹 2. दैत्य घुइसुर, चरवाहा और त्रेतायुगीन श्रीराम प्रसंग

दैत्य घुइसुर की तपस्या: एक अन्य जनश्रुति के अनुसार, भगवान भोलेनाथ के अनन्य आराधक 'घुइसुर' नामक दैत्य ने यहाँ घोर तपस्या कर इस सिद्ध शिवलिंग की स्थापना की थी। वहीं एक अन्य मान्यता इसे घुइसर नाम के एक सीधे-सरल चरवाहे की भक्ति से भी जोड़ती है।

प्रभु श्रीराम का पूजन: त्रेतायुग में 14 वर्ष के वनवास के समय जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ सई नदी के तट से आगे बढ़ रहे थे, तो उन्होंने इसी स्थल पर महादेव की विधिवत पूजा-अर्चना की थी।

🌉 मंदिर की खासियत, सस्पेंशन ब्रिज और सुरम्य पर्यटन

बाबा घुइसरनाथ धाम केवल एक धार्मिक पूजा-स्थल नहीं, बल्कि प्राकृतिक पर्यटन का भी एक आकर्षक केंद्र है:

प्रमुख आकर्षण विशेषता एवं पर्यटन अनुभव
सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल) सई नदी पर हाल ही में ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला की तर्ज पर एक आकर्षक झूला पुल बनाया गया है, जो फोटोग्राफी, नदी के विहंगम दृश्य और सुकून भरी सैर के लिए पर्यटकों का मुख्य केंद्र है।
सई नदी रिवरफ्रंट घाट मंदिर के ठीक बगल से बहती सई नदी के किनारे पक्के घाट हैं, जहाँ श्रद्धालु पवित्र स्नान कर जलपात्र भरकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं।
पारंपरिक स्थापत्य कला मंदिर का गर्भगृह पारंपरिक लाल व बादामी बलुआ पत्थरों से निर्मित है, जो ग्रीष्मकाल में भी आंतरिक वातावरण को शीतल बनाए रखता है।
परिसर के अन्य देवालय मुख्य मंदिर के साथ-साथ परिसर में तिरुपति बालाजी, काल भैरव, कार्तिकेय स्वामी, पवनपुत्र हनुमान और माँ पार्वती के भव्य मंदिर स्थापित हैं।

🎊 राष्ट्रीय घुइसरनाथ महोत्सव और प्रमुख धार्मिक पर्व

बाबा घुइसरनाथ धाम में वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, किंतु दो अवसरों पर यहाँ का दृश्य अद्वितीय होता है:

  • राष्ट्रीय घुइसरनाथ महोत्सव (महाशिवरात्रि): प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से यहाँ कई दिनों तक चलने वाला 'राष्ट्रीय घुइसरनाथ महोत्सव' आयोजित होता है, जिसमें ख्यातिलब्ध कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विशाल मेला लगता है।
  • पवित्र सावन मास व कांवड़ यात्रा: सावन के प्रत्येक सोमवार को लाखों कांवड़िए गंगाजी (शृंगवेरपुर व प्रयागराज) से पवित्र गंगाजल लाकर बाबा घुइसरनाथ का जलाभिषेक करते हैं। पूरा क्षेत्र 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से गूंज उठता है।
  • साप्ताहिक मेला: प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को दूर-दराज के जनपदों (अमेठी, रायबरेली, जौनपुर, प्रयागराज, सुल्तानपुर) से भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं।

📸 बाबा घुइसरनाथ धाम: संपूर्ण छायाचित्र दीर्घा (Photo Gallery)

बाबा घुइसरनाथ मुख्य मंदिर, शिखर, गर्भगृह, सई नदी तट, सस्पेंशन झूला पुल एवं परिसर के विहंगम मूल छायाचित्र (बड़ा देखने के लिए किसी भी तस्वीर पर क्लिक करें):

🎥 बाबा घुइसरनाथ धाम: वीडियो दर्शन एवं झूला पुल (Video Tour)

बाबा घुइसरनाथ मंदिर परिसर, सई नदी का सुरम्य घाट और नए सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल) का सजीव वीडियो दर्शन:

📍 बाबा घुइसरनाथ धाम कैसे पहुँचें (Travel Guide & Google Map)

बाबा घुइसrनाथ धाम प्रतापगढ़ और लालगंज से सड़क मार्ग द्वारा सुगम रूप से जुड़ा हुआ है:

यातायात का साधन निकटतम केंद्र एवं दूरी पहुँचने का सुगम मार्ग
🚗 सड़क मार्ग (Road) लालगंज (10 किमी) | प्रतापगढ़ मुख्यालय (38 किमी) लालगंज कस्बे से सांगीपुर रोड होकर सीधे मंदिर तक पक्की सड़क है। ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन सुलभ हैं।
🚆 रेल मार्ग (Train) लालगंज, अंतू (25 किमी) या प्रतापगढ़ जंक्शन (38 किमी) प्रतापगढ़ जंक्शन या लालगंज स्टेशन से मंदिर के लिए नियमित ऑटो और निजी टैक्सियां उपलब्ध रहती हैं।
✈️ वायु मार्ग (Air) प्रयागराज एयरपोर्ट (85 किमी) / लखनऊ एयरपोर्ट (120 किमी) एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा लालगंज होते हुए सीधे घुइसरनाथ धाम पहुँचा जा सकता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

Q1. बाबा घुइसरनाथ धाम कहाँ स्थित है?

यह पवित्र धाम उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में लालगंज अझरा तहसील के अंतर्गत सांगीपुर ब्लॉक में सई नदी के तट पर स्थित है। यह लालगंज कस्बे से मात्र 10 किमी और जिला मुख्यालय से लगभग 38 किमी दूर है।

Q2. इस धाम का नाम 'घुइसरनाथ' कैसे पड़ा?

शिवपुराण के अनुसार माता घुश्मा की अनन्य भक्ति से यहाँ द्वादश ज्योतिर्लिंग स्वरूप 'घुश्मेश्वर' महादेव प्रकट हुए थे, जो स्थानीय भाषा में घुइसरनाथ कहलाए। एक अन्य लोककथा के अनुसार 'घुइसुर' नामक दैत्य ने यहाँ शिवजी की स्थापना की थी।

Q3. त्रेतायुग और भगवान श्रीराम का इस धाम से क्या संबंध है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, 14 वर्ष के वनवास के समय भगवान श्रीराम ने माता जानकी और लक्ष्मण जी के साथ सई नदी के इसी पावन कछार पर पड़ाव डाला था और भगवान शिव की पार्थिव पूजा की थी।

Q4. यहाँ का सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल) क्यों प्रसिद्ध है?

सई नदी के दोनों किनारों को जोड़ने हेतु ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला की तर्ज पर यहाँ एक भव्य सस्पेंशन ब्रिज बनाया गया है। यह पर्यटकों को नदी, मंदिर के शिखरों और प्राकृतिक हरियाली का मनोरम विहंगम दृश्य प्रदान करता है।

Q5. दर्शन का सर्वोत्तम समय और प्रमुख उत्सव कौन से हैं?

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ बहुचर्चित 'राष्ट्रीय घुइसरनाथ महोत्सव' और विशाल मेला लगता है। सावन के महीने में लाखों कांवड़िए जलाभिषेक करते हैं। मंदिर वर्ष भर प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है।

Q6. मंदिर परिसर में अन्य कौन-कौन से देवालय हैं?

बाबा घुइसरनाथ के मुख्य गर्भगृह के अलावा यहाँ भगवान तिरुपति बालाजी, काल भैरव, कार्तिकेय, संकटमोचन हनुमान और माता पार्वती के भव्य मंदिर भी स्थापित हैं।

📚 आध्यात्मिक व सांस्कृतिक संदर्भ:
1. शिव महापुराण (कोटिरुद्र संहिता - द्वादश ज्योतिर्लिंग घुश्मेश्वर प्रसंग)
2. उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग (राष्ट्रीय घुइसरनाथ महोत्सव प्रतिवेदन)
3. प्रतापगढ़ जिला गजेटियर (लालगंज अजहरा व सई नदी तीर्थ परंपरा)

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