भदरी किला कुंडा, प्रतापगढ़ (Bhadari Fort, Kunda, Pratapgarh)

🏰 अवध की ऐतिहासिक धरोहर • बिसेन राजपूत शौर्य गाथा

भदरी किला कुंडा: बिसेन राजपूतों का 300 साल पुराना इतिहास, रानी शेरोज कंवर का अदम्य साहस और राजा भैया का पैतृक राजभवन

अगर आप लखनऊ-प्रयागराज हाईवे (NH-30) से होकर कुंडा कस्बे में दाखिल हों और किसी से पूछें कि भदरी किधर है, तो सामने वाला बड़े आदर से हाथ उठाकर रास्ता दिखा देगा। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा तहसील में स्थित 'भदरी' (Bhadri) केवल एक गाँव नहीं, बल्कि अवध के इतिहास की सबसे प्रभावशाली और स्वाभिमानी बिसेन राजपूत (Bisen Rajput) तालुकेदारी का ऐतिहासिक गढ़ है। 18वीं सदी के नाज़िम संग्राम से लेकर आज़ाद भारत के लोकतांत्रिक इतिहास तक, भदरी ने भारतीय राजनीति, स्वतंत्रता आंदोलन और समाज निर्माण में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

🏛️ रियासत व कुल
बिसेन राजपूत वंश (अवध)
👑 ऐतिहासिक पदवी
'राय' (1748 में दिल्ली दरबार से)
⚔️ निर्णायक संग्राम
1798 नाज़िम जंग व 8 दिन की घेराबंदी
🎖️ दूरदर्शी विभूति
राजा बजरंग बहादुर सिंह (उपराज्यपाल)
📍 वर्तमान पहचान
कुंवर रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया'
🏰 स्थापत्य व परिसर
अवध-राजपूत गढ़ी व बेंती झील
भदरी किला प्रतापगढ़ Bhadari Kila Pratapgarh

📍 1. कुंडा मोड़ पर चर्चा — भदरी रियासत का पहला परिचय

🏍️ विकास (प्रयागराज से आया बाइकर मुसाफिर)

"श्यामू भइया, ज़रा दो कुल्हड़ कड़क अदरक वाली चाय बनाइए! हम लोग सुबह से बाइक से निकले हैं। हाईवे पर कुंडा का बोर्ड देखकर रुके। सुना है यहीं पास में वो मशहूर भदरी किला है, जिसके किस्से पूरे अवध में गूंजते हैं? ज़रा बताइए ना, इस जगह में ऐसा क्या खास है?"

☕ श्यामू भइया (कुंडा मोड़ के पुराने चाय वाले)

"अरे भइया! आप लोग बिल्कुल सही जगह रुके हो। कुल्हड़ की चाय की चुस्की लीजिए और इत्मीनान से सुनिए। यहाँ से बस आठ किलोमीटर अंदर मुड़ते ही भदरी शुरू हो जाता है। भदरी कोई आम देहात नहीं है भइया! यह अवध के सबसे जांबाज बिसेन राजपूतों की वो माटी है, जिसने कभी मुग़लों के नाज़िमों के आगे घुटने नहीं टेके। इस किले की एक-एक ईंट में 300 साल का स्वाभिमान और मर्दानगी भरी हुई है!"

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कुंडा तहसील का नाम सुनते ही सबसे पहले ज़हन में भदरी रियासत की तस्वीर उभरती है। ब्रिटिश काल में अवध क्षेत्र के भीतर बिसेन क्षत्रियों की कई बड़ी रियासतें थीं, लेकिन भदरी तालुकेदारी ने अपने सैन्य बल, स्वाभिमान और स्वायत्तता के बल पर एक अलग ही मुकाम बनाया।

विषय (Particulars) विवरण (Information)
स्थान व अवस्थिति भदरी, कुंडा तहसील, जनपद प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश)
मूल वंश व कुल बिसेन राजपूत वंश (Bisen Rajput Clan of Oudh)
संस्थापक राय सबल शाह के वंशज (18वीं शताब्दी)
शासकीय उपाधि 'राय' (Rai) — 1748 में दिल्ली दरबार से प्रदत्त
प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं 1798 का नाज़िम संग्राम, 1810 में रानी शेरोज कंवर द्वारा 8 दिनों का ऐतिहासिक घेराव
अंतिम रियासती शासक राजा बजरंग बहादुर सिंह (हिमाचल प्रदेश के दूसरे उपराज्यपाल व पंतनगर विवि के संस्थापक)
वर्तमान मुखिया व पीढ़ी राजा उदय प्रताप सिंह एवं कुंवर रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया' (लगातार सात बार विधायक)
वास्तुकला शैली पारंपरिक अवध-राजपूत गढ़ी वास्तुकला, विशाल प्राचीर, बुर्ज व बेंती झील परिसर
निकटतम रेलवे स्टेशन कुंडा हरनामगंज (लगभग 8 किमी) व प्रयागराज जंक्शन (55 किमी)

⚔️ 2. 1798 का नाज़िम संग्राम और वीरांगना रानी शेरोज कंवर का अदम्य पराक्रम

🏍️ अमित (विकास का साथी बाइकर)

"श्यामू भइया, आपने कहा कि इन्होंने कभी नवाबों और अंग्रेज़ों के आगे सिर नहीं झुकाया... इसके पीछे की कोई सच्ची लड़ाई का किस्सा सुनाइए ना!"

☕ श्यामू भइया

"सुनो अमित बाबू! साल 1748 में मानिकपुर की लड़ाई के बाद दिल्ली दरबार से यहाँ के मुखिया जीत सिंह को 'राय' की बड़ी पदवी मिली थी। इसके बाद से सभी शासक अपने नाम के आगे 'राय' लगाने लगे। फिर आया साल 1798... जब लखनऊ के नवाब के नाज़िम मिर्ज़ा जान ने भदरी पर भारी लगान थोपने की कोशिश की। भदरी के तालुकदार राय दलजीत सिंह ने साफ मना कर दिया कि अपनी माटी का हक नहीं देंगे। वहीं मैदान में भीषण संग्राम छिड़ गया और राय दलजीत सिंह लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए।"

राय दलजीत सिंह के बलिदान के बाद उनके सुपुत्र राय ज़लिम सिंह ने कमान संभाली। लेकिन 1810 में लखनऊ में नवाब के दरबारियों ने छल से राय ज़लिम सिंह को बंदी बना लिया और पूरी भदरी रियासत को सीधे शाही खजाने (खालसा) में जब्त करने का हुक्म दे दिया।

👑 वीरांगना रानी शेरोज कंवर की 8 दिनों की ऐतिहासिक किलेबंदी

जब भदरी की गद्दी संकट में थी और राजा कैद में थे, तब राय ज़लिम सिंह की धर्मपत्नी रानी शेरोज कंवर ने वो कर दिखाया जो इतिहास में अमर हो गया। उन्होंने धार्मिक अनुष्ठान और पूजा का बहाना बनाकर लखनऊ से भदरी का रुख किया। यहाँ आकर उन्होंने चुपचाप अपने वफादार बिसेन राजपूत सैनिकों को इकट्ठा किया और नवाब के अधिकारियों को खदेड़कर किले पर अपना कब्जा जमा लिया।

क्रोधित होकर नवाब के चकलदार जगत किशोर ने भारी तोपों और सेना के साथ भदरी किले को चारों तरफ से घेर लिया। रानी शेरोज कंवर ने घबराने के बजाय किले के मुख्य फाटक बंद करवाए और लगातार आठ दिनों तक किले की प्राचीरों से तोपों व बंदूकों से मुकाबला किया। अंततः लखनऊ के नवाब को रानी की बहादुरी के आगे झुकना पड़ा, शाही फौज पीछे हटी और 1815 में राय ज़लिम सिंह को सम्मान सहित रिहा किया गया।

भदरी किला कुंडा प्रतापगढ़ Bhadari Kila Kunda Pratapgarh भदरी फोर्ट प्रतापगढ़ Bhadari Fort Pratapgarh भदरी का किला प्रतापगढ़ Bhadari ka Kila Pratapgarh

🏰 3. किले की वास्तुकला — गढ़ी शैली, सुरक्षा बुर्ज व ऐतिहासिक अवशेष

☕ श्यामू भइया

"विकास बाबू, जब आप किले के अंदर कदम रखेंगे, तो आपको समझ आएगा कि रानी शेरोज कंवर ने आठ दिनों तक उस विशाल शाही फौज को कैसे रोके रखा था। यह किला किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह युद्ध-कला और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया था!"

भदरी रियासत का स्थापत्य अवध और राजपूत गढ़ी वास्तुकला का अनुपम सम्मिश्रण है। मध्यकाल में जब डाकुओं और विदेशी आक्रांताओं का भय रहता था, तब राजपूत रियासतें ऐसी गढ़ी बनाती थीं जिसे भेदना असंभव हो:

  • मज़बूत ईंट-पत्थर की ऊंची दीवारें: प्राचीरें इतनी चौड़ी थीं कि उन पर तोपों को आसानी से घुमाया और तैनात किया जा सकता था।
  • तोप दागने के झरोखे: दीवारों में तीरंदाजों और बंदूकचियों के लिए खास कोणों पर झरोखे बनाए गए थे, जहाँ से बाहर का दुश्मन तो साफ दिखता था लेकिन भीतर का सिपाही पूरी तरह सुरक्षित रहता था।
  • चारों कोनों पर बुर्ज: दूर-दूर तक निगरानी रखने के लिए विशाल सुरक्षा बुर्ज बनाए गए थे, जहाँ से कुंडा और मानिकपुर तक के रास्तों पर नज़र रखी जाती थी।
  • सुंदर नक्काशीदार मेहराब व स्तंभ: सुरक्षा के साथ-साथ भीतर के दीवानखाने और आवासीय महलों में अवधी नक्काशी और क्लासिक खंभों की सुंदरता आज भी देखने लायक है।
भदरी का किला कुंडा प्रतापगढ़ Bhadari ka Kila Kunda Pratapgarh भदरी प्रतापगढ़ किला Bhadari Pratapgarh Kila भदरी प्रतापगढ़ का किला Bhadari Pratapgarh ka kila

✈️ 4. राजा बजरंग बहादुर सिंह — स्वतंत्रता सेनानी, उपराज्यपाल और दूरदर्शी विभूति

🏍️ विकास

"श्यामू भइया, हमने सुना है कि आज़ादी के बाद भी भदरी परिवार के राजा साहब बहुत बड़े पदों पर रहे और उन्होंने देश के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया?"

☕ श्यामू भइया

"हाँ विकास बाबू! भदरी का नाम पूरे देश में रौशन करने वाले महापुरुष थे राजा बजरंग बहादुर सिंह (1905–1970)। वे भदरी रियासत के अंतिम शासक थे। आज़ादी के आंदोलन में उन्होंने खुलकर हिस्सा लिया और जब 1947 में भारत आज़ाद हुआ, तो उन्होंने बिना किसी शर्त के अपनी पूरी रियासत का भारत गणराज्य में विलय कर दिया।"

राजा बजरंग बहादुर सिंह का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे केवल एक राजा नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने वाले दूरदर्शी स्टेट्समैन थे:

🇮🇳 हिमाचल प्रदेश के दूसरे उपराज्यपाल

वे 1 जनवरी 1955 से 13 अगस्त 1963 तक हिमाचल प्रदेश के दूसरे उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) रहे। उनके 8 साल के कार्यकाल में पहाड़ी राज्य में सड़कों, स्कूलों और सेब की बागवानी की ऐतिहासिक नींव रखी गई।

🌾 पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के संस्थापक

वे भारत के पहले कृषि विश्वविद्यालय — गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (पंतनगर) के संस्थापक कुलपति (Vice-Chancellor) रहे। उन्होंने देश में हरित क्रांति की वैज्ञानिक शुरुआत में अहम भूमिका निभाई।

✈️ कुशल पायलट व प्रगतिशील किसान

वे स्वयं एक मंझे हुए पायलट थे और उनके पास अपना निजी विमान था। उन्होंने भदरी क्षेत्र में उन्नत पशुपालन, डेयरी, आधुनिक बोरवेल और नई खेती का वो मॉडल खड़ा किया जिसे देखने दूर-दूर से विशेषज्ञ आते थे।

चूँकि राजा बजरंग बहादुर सिंह की अपनी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने अपने भतीजे राय उदय प्रताप सिंह को विधिवत गोद लिया। 1970 में उनके गोलोकगमन के बाद राय उदय प्रताप सिंह ने भदरी रियासत के प्रमुख की ज़िम्मेदारी संभाली।

राजा बजरंग बहादुर सिंह भदरी किला Raja Bajrang Bahadur Singh Bhadari Kila राजा उदय प्रताप सिंह भदरी कुंडा Raja Uday Pratap Singh Bhadari Kunda राजा भैया भदरी किला कुंडा प्रतापगढ़ Raja Bhaiya Bhadari Kila Kunda Pratapgarh

🌿 5. भदरी कोठी, बेंती राजभवन और प्राकृतिक झील संपदा

🏍️ अमित

"श्यामू भइया, लोग अक्सर भदरी और बेंती का नाम एक साथ लेते हैं। इन दोनों जगहों में क्या फर्क है?"

☕ श्यामू भइया

"बड़ा वाजिब सवाल पूछा बाबू! भदरी वह ऐतिहासिक गढ़ी किला है जहाँ रियासत का प्राचीन दरबार लगता था और जहाँ 1798 की लड़ाई लड़ी गई थी। और भदरी से कुछ ही दूरी पर स्थित है बेंती (Benti) — जो राजपरिवार का आधुनिक आवासीय महल और प्रकृति का स्वर्ग है! वहाँ एक विशाल प्राकृतिक झील फैली हुई है, जहाँ हज़ारों मील दूर साइबेरिया से आने वाले प्रवासी पक्षी डेरा डालते हैं।"

राजा उदय प्रताप सिंह को पर्यावरण, वानिकी और प्रकृति संरक्षण का गहरा शौक है। उन्होंने बेंती राजभवन और उसके आसपास आधुनिक तकनीक और प्रकृति के संतुलन का एक अद्भुत मॉडल तैयार किया है:

  • विशाल बेंती झील: प्राकृतिक जल संचयन और मछलियों, बत्तखों व विदेशी प्रवासी परिंदों का सुरक्षित बसेरा।
  • सोलर एनर्जी प्लांट (Solar Power): पूरा परिसर सौर ऊर्जा से जगमगाता है, जो आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण है।
  • देशी गौ-संवर्धनशाला: शुद्ध भारतीय नस्ल की गायों के संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाता है।
  • सघन वन संपदा: हजारों फलदार और छायादार वृक्षों से आच्छादित यह परिसर किसी प्राकृतिक अभयारण्य जैसा प्रतीत होता है।
भदरी कोठी कुंडा प्रतापगढ़ Bhadari Kothi Kunda Pratapgarh भदरी फोर्ट कुंडा प्रतापगढ़ Bhadari Fort Kunda Pratapgarh भदरी राजभवन कुंडा प्रतापगढ़ Bhadari Rajbhavan Kunda Pratapgarh

👑 6. लोकतांत्रिक दौर — कुंवर रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया' व जनसेवा

☕ श्यामू भइया

"और आज के दौर में इस परिवार की पहचान हैं राजा उदय प्रताप सिंह के सुपुत्र — कुंवर रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया'। 1993 में जब वे पहली बार कुंडा से चुनाव मैदान में उतरे, तो उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की। तब से लेकर आज तक, पिछले 30 सालों में उन्होंने लगातार सात बार जीत का परचम लहराया है और कभी कोई चुनाव नहीं हारे!"

राजा भैया ने अपनी राजनीतिक पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) का गठन किया और उत्तर प्रदेश सरकार में कई बार महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे। कुंडा के ग्रामीण अंचल में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कों का जाल बिछाने और गरीबों की मदद के लिए उनका बेंती दरबार पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय रहता है।

भदरी रियासत कुंडा प्रतापगढ़ Bhadari Riyasat Kunda Pratapgarh भदरी हवेली कुंडा प्रतापगढ़ Bhadari Haveli Kunda Pratapgarh

🚗 7. भदरी किला कैसे पहुंचें — दूरी एवं सड़क मार्ग सारणी

भदरी किला उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों — प्रयागराज, लखनऊ, प्रतापगढ़ और अयोध्या से बेहतरीन राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल नेटवर्क से सीधे जुड़ा हुआ है।

प्रारंभिक स्थल (City) दूरी (Distance) सर्वोत्तम मार्ग (Best Route)
कुंडा तहसील मुख्यालय (Kunda) 8 किमी कुंडा-भदरी मार्ग (ऑटो, ई-रिक्शा, निजी वाहन द्वारा मात्र 15 मिनट)
प्रयागराज (Prayagraj / Allahabad) 55 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग NH-30 (प्रयागराज-लखनऊ हाईवे वाया कुंडा)
प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय (Bela Pratapgarh) 60 किमी प्रतापगढ़ - लालगंज - कुंडा - भदरी राज्य मार्ग
लखनऊ राजधानी (Lucknow) 150 किमी NH-30 (लखनऊ-रायबरेली-ऊंचाहार-कुंडा मार्ग द्वारा लगभग 3 घंटे)
अयोध्या धाम (Ayodhya) 180 किमी अयोध्या - सुल्तानपुर - प्रतापगढ़ - कुंडा मार्ग
वाराणसी (Varanasi / Kashi) 175 किमी वाराणसी - प्रयागराज (NH-19) तत्पश्चात कुंडा (NH-30)
राजा भईया भदरी का किला कुंडा प्रतापगढ़ Raja Bhaiya Bhadri Kila Kunda Pratapgarh रघुराज प्रताप सिंह भदरी कोठी कुंडा प्रतापगढ़ Raghuraj Pratap Singh Bhadari Kothi Kunda Pratapgarh

🎥 8. भदरी किला व राजभवन वीडियो दर्शन एवं लाइव सेटेलाइट मैप

🗺️ भदरी किला राजभवन मार्ग (कुंडा, प्रतापगढ़) — लाइव सेटेलाइट नेविगेशन

❓ 9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. भदरी किला उत्तर प्रदेश में कहाँ स्थित है?

भदरी किला उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा तहसील में स्थित है। यह कुंडा मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर और प्रयागराज-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-30) से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

2. भदरी राजघराने के प्रसिद्ध ऐतिहासिक व्यक्ति कौन-कौन हैं?

भदरी राजघराने में स्वतंत्रता सेनानी व हिमाचल प्रदेश के दूसरे उपराज्यपाल राजा बजरंग बहादुर सिंह, उनके उत्तराधिकारी राजा उदय प्रताप सिंह और वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध राजनेता कुंवर रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया' प्रमुख हैं।

3. वीरांगना रानी शेरोज कंवर का इतिहास में क्या महत्व है?

1810 में जब तालुकदार राय ज़लिम सिंह लखनऊ में कैद थे, तब उनकी पत्नी रानी शेरोज कंवर ने असाधारण साहस दिखाते हुए भदरी के किले में चकलदार जगत किशोर की शाही सेना की 8 दिनों की घेराबंदी का तोपों से डटकर मुकाबला किया था और नवाब को समझौता करने पर विवश कर दिया था।

4. भदरी और बेंती महल में क्या अंतर है?

भदरी रियासत का ऐतिहासिक और प्राचीन गढ़ी किला है जहाँ रियासत का पुराना प्रशासनिक केंद्र हुआ करता था, जबकि बेंती कुछ दूरी पर स्थित आधुनिक समय का मुख्य आवासीय राजभवन व विशाल प्राकृतिक झील क्षेत्र है।

5. भदरी किला पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट कौन सा है?

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कुंडा हरनामगंज (KHNM) है जो मात्र 8 किमी दूर है। प्रमुख रेलवे जंक्शन प्रयागराज (55 किमी) है। सबसे नजदीकी हवाई अड्डा प्रयागराज एयरपोर्ट (बमरौली - 50 किमी) और लखनऊ अमौसी एयरपोर्ट (145 किमी) है।

📜 उपसंहार — कुंडा मोड़ से विदा लेते हुए

"चाय का कुल्हड़ खत्म हो चुका था और श्यामू भइया की बातों ने दोनों मुसाफिरों के भीतर एक नई ऊर्जा भर दी थी। विकास और अमित ने अपनी बाइकों की चाबी घुमाई और भदरी की पक्की डगर पर आगे बढ़ चले। यह यात्रा केवल एक पुरानी हवेली देखने की नहीं थी, बल्कि यह उस माटी को नमन करने की डगर थी जहाँ एक वीरांगना ने आठ दिनों तक तोपों के मुंह मोड़ दिए थे और जहाँ के राजा ने आज़ादी के बाद पूरे देश को दिशा दी थी।"

अगर आप कभी कुंडा आएं, तो भदरी के इन विशाल परकोटों और बेंती की शांत झील को अपनी आँखों से देखना न भूलें — यह अवध के स्वाभिमान का वो पन्ना है जो सदियों तक चमकता रहेगा!

स्रोत और प्रामाणिक संदर्भ (Sources & Citations):
यह लेख निम्नलिखित प्रामाणिक व ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर तैयार किया गया है:
  • District Administration Pratapgarh (pratapgarh.nic.in) — History, Taluqdars of Oudh & Gazetteer
  • उत्तर प्रदेश ज़िला गजेटियर (प्रतापगढ़): भदरी रियासत, मानिकपुर युद्ध व 1798 नाज़िम संग्राम विवरण
  • हिमाचल प्रदेश राजभवन अभिलेख: उपराज्यपाल राजा बजरंग बहादुर सिंह (1955-1963) कार्यकाल दस्तावेज
  • पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय (GBPUAT) ऐतिहासिक अभिलेखागार: संस्थापक कुलपति रिकॉर्ड्स
  • प्रतापगढ़ HUB (pratapgarhup.in): भदरी रियासत व कुंडा अंचल ग्राउंड सर्वे
(नोट: लेख में उल्लिखित सभी ऐतिहासिक तिथियां, वंशावली क्रम, दूरी सारणी और घटनाएं प्रामाणिक सरकारी गजेटियर और ऐतिहासिक अभिलेखों से सत्यापित हैं।)
🎯 1. मुख्य व ब्रांड कीवर्ड्स: भदरी किला कुंडा Bhadri Fort Kunda Bhadri Palace Pratapgarh Pratapgarh HUB Raja Bhaiya Haveli Kunda भदरी रियासत का इतिहास
📍 2. स्थानीय व भौगोलिक खोज: कुंडा हरनामगंज रेलवे स्टेशन बेंती झील कुंडा Benti Palace Pratapgarh प्रयागराज से भदरी दूरी NH-30 कुंडा प्रतापगढ़ मानिकपुर प्रतापगढ़
🏰 3. ऐतिहासिक, युद्ध व रियासत खोज: बिसेन राजपूत वंश अवध 1798 नाज़िम संग्राम रानी शेरोज कंवर राय दलजीत सिंह भदरी राय ज़लिम सिंह अवध के तालुकेदार
👑 4. शासक, व्यक्तित्व व आधुनिक राजनीतिक खोज: राजा बजरंग बहादुर सिंह हिमाचल प्रदेश के दूसरे उपराज्यपाल पंतनगर विश्वविद्यालय संस्थापक राजा उदय प्रताप सिंह भदरी कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया जनसत्ता दल लोकतांत्रिक
❓ 5. लांग-टेल सवाल व बोलचाल की खोज: भदरी किला कहाँ स्थित है राजा भैया का पैतृक महल कहाँ है रानी शेरोज कंवर का इतिहास क्या है भदरी और बेंती में क्या अंतर है कुंडा से भदरी कैसे जाएं

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !