दमदमा (पट्टी, प्रतापगढ़): 41 मानव समाधियाँ, त्रि-मानव शवाधान और महाभारत कालीन 'कीचक वध' का अनसुलझा रहस्य
जानिए महदहा से 5 किमी दूर वारीकलां मार्ग पर स्थित उस पुरास्थल की हकीकत, जहाँ पुरातत्व विभाग का बोर्ड न होने पर भी दफन है 10,000 साल पुराना इतिहास।
प्रतापगढ़ जिले के पट्टी विकास खंड में महदहा गाँव से लगभग 5 किलोमीटर आगे वारीकलां मार्ग पर स्थित है एक शांत एवं रहस्यमयी पुरास्थल—दमदमा (Damdama)। स्थानीय स्तर पर पुरातत्व विभाग का कोई सूचना बोर्ड न होने के कारण यहाँ के वास्तविक इतिहास को लेकर वर्षों से कई भ्रांतियां और कौतूहल रहा है। कोई इसे आभूषण और मिट्टी के बर्तनों की जगह बताता है, तो कोई इसे महाभारत काल के कीचक वध से जोड़ता है।
परंतु पुरातात्विक इतिहास के पन्नों में दमदमा कोई सामान्य स्थल नहीं है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा 1982 से 1987 के बीच कराए गए पाँच वर्षों के सघन उत्खनन में यहाँ से 41 मानव समाधियों में 48 मानव कंकाल प्राप्त हुए थे। यह संख्या सराय नाहर राय (11 समाधियां) और महदहा (28 समाधियां) दोनों से कहीं अधिक है, जो सिद्ध करती है कि दमदमा प्रागैतिहासिक भारत में आदिमानवों की सबसे विशाल और दीर्घकालिक बस्ती थी।
⚔️ महाभारत की लोककथा: दमदमा में कीचक का महल और भीम का महा-प्रतिशोध
दमदमा के टीले को लेकर स्थानीय अवध क्षेत्र में सदियों से महाभारत काल की एक अत्यंत रोमांचक कथा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास का समय राजा विराट के मत्स्य देश में वेश बदलकर व्यतीत किया था। राजा विराट की रानी सुदेष्णा का भाई और विराट सेना का महाबली सेनापति कीचक इसी क्षेत्र में अपना विशाल प्रासाद (महल) बनाकर रहता था।
जब कीचक ने द्रौपदी (सैरंध्री) के साथ राजसभा में दुर्व्यवहार किया, तब महाबली भीमसेन ने रात के अंधेरे में नृत्यशाला में मल्लयुद्ध कर कीचक की हड्डियों का चूर्ण बनाकर उसका वध कर दिया था। कीचक के वध से क्रोधित होकर उसके 105 उपकीचक भाइयों ने द्रौपदी को कीचक की चिता के साथ श्मशान में जिंदा जलाने की चेष्टा की।
कथा के अनुसार, भीम ने प्रकट होकर उन सभी उपकीचकों का संहार किया और दमदमा स्थित कीचक के पूरे महल में आग लगाकर उसकी छावनी को भस्म कर दिया। जो सैनिक जान बचाकर भागे, भीम ने उनका पीछा कर 5 किमी दूर महदहा के मैदान में वध कर दिया। यही कारण है कि स्थानीय ग्रामीण पीढ़ियों से यह विश्वास करते आए हैं कि दमदमा और महदहा में मिलने वाले विशालकाय मानव कंकाल उसी महाभारत कालीन युद्ध के मारे गए सैनिकों के हैं।
📋 पुरातात्विक उत्खनन एवं वैज्ञानिक तथ्य (Scientific Factsheet)
यद्यपि मौके पर बोर्ड न होने से स्थानीय लोगों को पूरी जानकारी नहीं मिल सकी, किंतु राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरातत्व शोध में दमदमा के उत्खनन परिणाम बेहद सुविख्यात हैं:
| पुरातात्विक पहलू | वैज्ञानिक साक्ष्य व आधिकारिक निष्कर्ष (Findings) |
|---|---|
| उत्खनन सत्र व दल | 1982-83 से 1986-87 (पाँच सत्र), प्रो. जी. आर. शर्मा, डॉ. वी. डी. मिश्र (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) |
| समाधियों की संख्या | 41 समाधियां, जिनमें कुल 48 मानव कंकाल उत्खनित किए गए |
| अनोखी त्रि-मानव समाधि | कब्र संख्या 20 में एक साथ 3 मानव कंकाल (2 पुरुष व 1 स्त्री) दफनाए मिले |
| युगल समाधियां (Double Burials) | 4 युगल समाधियां, जिनमें पुरुष-स्त्री और दो स्त्रियों के संयुक्त शवाधान शामिल हैं |
| हाथीदांत का आभूषण | मृतक के साथ समाधि में रखा गया हाथीदांत का कलात्मक लटकन (Ivory Pendant) मिला |
| गर्त चूल्हे (Pit Hearths) | 30 से अधिक चूल्हे, जली हुई फर्श (Burnt Floor Plaster) और अधजली पशु अस्थियां |
| प्राचीन वनस्पति आहार साक्ष्य | जंगली धान (Wild Rice) एवं बथुआ (Chenopodium) के जले हुए दानों के प्रामाणिक अवशेष |
| सूक्ष्म पाषाण औजार | चर्ट, कैल्सेडोनी, अगेट और क्वार्ट्ज से निर्मित हज़ारों ब्लेड, स्क्रेपर व बाणाग्र (Microliths) |
| आवासीय स्तर की मोटाई | 1.5 मीटर मोटा सांस्कृतिक जमाव, जो 10 अलग-अलग स्तरों (Layers) में विभक्त है |
⚰️ त्रि-मानव समाधि: दक्षिण एशिया की दुर्लभतम पुरातात्विक खोज
दमदमा पुरास्थल की सबसे सनसनीखेज खोज यहाँ की कब्र संख्या 20 थी। इस अंडाकार समाधि में तीन मानव कंकालों को एक साथ एक ही गड्ढे में दफनाया गया था:
🔬 समाधि संरचना और मानवविज्ञानी रहस्य
- शवों की स्थिति: समाधि में नीचे एक पुरुष और एक स्त्री का शव रखा गया था, जबकि उनके ऊपर तीसरे पुरुष का शव लिटाया गया था। सभी के सिर पश्चिम और पैर पूर्व की ओर थे।
- हाथीदांत और हड्डी के उपहार: इन मृतकों के पास सूक्ष्म पाषाण औजार, जानवरों के सींग और हड्डी के बाणाग्र ससम्मान रखे गए थे, जो मृत्यु के बाद के जीवन (Life after Death) में उनके गहरे विश्वास को दर्शाता है।
- सामाजिक ताना-बाना: एक ही समाधि में तीन व्यक्तियों का दफन होना यह प्रमाणित करता है कि किसी आकस्मिक आपदा या फिर कबीले के प्रमुख व्यक्ति के निधन पर अनुष्ठानिक रूप से परिजनों/सहयोगियों को साथ समाधिस्थ किया जाता था।
🌾 केवल मांसाहार नहीं, जंगली धान व कंदमूल का प्रयोग: आहार क्रांति
सराय नाहर राय और महदहा की तरह दमदमा से भी 30 से अधिक गर्त चूल्हे मिले हैं, जिनमें गाय, भैंस, बारहसिंगा, नीलगाय, जंगली सूअर, हिरण, कछुए, मछली और पक्षियों की अधजली हड्डियां मिलीं।
किंतु दमदमा की सबसे अनूठी वैज्ञानिक देन पुरा-वनस्पति अवशेष (Archaeobotanical Findings) हैं। यहाँ के चूल्हों की राख की माइक्रोस्कोपिक जांच में जंगली धान (Wild Rice), बथुआ (Chenopodium) और विभिन्न जंगली घासों के जले हुए बीज मिले हैं। साथ ही सिल-बट्टे (Querns & Mullers) भी भारी संख्या में मिले। यह इस बात का प्रमाण है कि 10,000 वर्ष पूर्व का मनुष्य केवल मांस पर निर्भर नहीं था, बल्कि गंगा के कछार में उगने वाले जंगली अनाजों को पीसकर पकाना शुरू कर चुका था, जो आगे चलकर कृषि क्रांति की आधारशिला बना।
🗺️ प्रतापगढ़ का पाषाण कालीन त्रिकोण: सराय नाहर राय, महदहा व दमदमा
इतिहास और पुरातत्व की पुस्तकों में प्रतापगढ़ के इन तीन पुरास्थलों को 'गंगा घाटी की पाषाण युगीन त्रयी' कहा जाता है। तीनों स्थलों की स्पष्ट तुलना नीचे दी गई है:
| पुरास्थल का नाम | उत्खनन सत्र | समाधियों की संख्या | सर्वोच्च विशिष्ट पहचान व खोज |
|---|---|---|---|
| सराय नाहर राय | 1969 से 1973 | 11 समाधियाँ (15 कंकाल) | गंगा घाटी का सबसे प्राचीन स्थल, 4 शवों की संयुक्त समाधि, तीर के घाव का साक्ष्य |
| महदहा (Mahadaha) | 1977 से 1979 | 28 समाधियाँ (30 कंकाल) | स्त्री-पुरुष युगल समाधि, बारहसिंगे के सींग का कंठहार (आभूषण), बूचड़खाना |
| दमदमा (Damdama) | 1982 से 1987 | 41 समाधियाँ (48 कंकाल) | सर्वाधिक समाधियां, त्रि-मानव समाधि, हाथीदांत का पेंडेंट, जंगली धान के बीज |
📸 दमदमा पुरास्थल: संपूर्ण छायाचित्र दीर्घा (Photo Gallery)
दमदमा गाँव, वारीकलां मार्ग, प्राचीन पुरातात्विक टीले और उत्खनन क्षेत्र के मूल छायाचित्र (बड़ा देखने के लिए किसी भी तस्वीर पर क्लिक करें):
📍 दमदमा पुरास्थल कैसे पहुंचें (Google Map Location)
दमदमा पुरास्थल प्रतापगढ़ जिले की पट्टी तहसील में महदहा गाँव से लगभग 5 किमी आगे वारीकलां मार्ग पर स्थित है। शोधार्थी और इतिहास-प्रेमी नीचे दिए गए गूगल मानचित्र से सीधी लोकेशन देख सकते हैं:
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. दमदमा पुरास्थल कहाँ स्थित है और इसका उत्खनन किसने किया था?
दमदमा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी विकास खंड में महदहा से 5 किमी आगे वारीकलां मार्ग पर स्थित है। इसका वैज्ञानिक उत्खनन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग द्वारा 1982 से 1987 के मध्य कराया गया था।
Q2. यहाँ पुरातत्व विभाग का बोर्ड क्यों नहीं लगा है?
उत्खनन कार्य 1987 में पूर्ण हो जाने के बाद अवशेषों को वैज्ञानिक परीक्षण हेतु विश्वविद्यालयों और संग्रहालयों में संरक्षित कर दिया गया। स्थानीय स्तर पर पर्यटन विकास और सूचना बोर्ड न लगाए जाने के कारण ग्रामीणों में इसके इतिहास को लेकर असमंजस रहा।
Q3. दमदमा से कुल कितनी समाधियां मिली हैं?
दमदमा से कुल 41 समाधियां (Graves) प्राप्त हुई हैं, जिनमें 48 मानव कंकाल मिले हैं। यह संख्या पूरे उत्तर भारत के किसी भी मध्य पाषाण कालीन स्थल से सर्वाधिक है।
Q4. त्रि-मानव समाधि (Triple Burial) की क्या विशेषता है?
दमदमा की कब्र संख्या 20 में एक साथ तीन मानव कंकाल (दो पुरुष और एक स्त्री) दफनाए मिले थे। यह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में मध्य पाषाण काल का अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक शवाधान है।
Q5. महाभारत के कीचक वध से दमदमा का क्या संबंध है?
स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान राजा विराट के सेनापति कीचक का महल दमदमा में था। द्रौपदी के अपमान पर भीम ने कीचक और उसके साथियों का वध कर महल को भस्म कर दिया था। ग्रामीण यहाँ मिले कंकालों को उसी युद्ध से जोड़ते हैं।
Q6. यहाँ से किस प्रकार के प्राचीन आभूषण और आहार साक्ष्य मिले हैं?
यहाँ से हाथी दांत का एक दुर्लभ लटकन (Ivory Pendant), हड्डी के आभूषण तथा 30 से अधिक गर्त चूल्हों से जंगली धान (Wild Rice) और बथुए के जले हुए बीज मिले हैं, जो शाकाहार और मांसाहार दोनों के उपयोग को सिद्ध करते हैं।
1. प्रो. जी. आर. शर्मा, डॉ. वी. डी. मिश्र, जे. एन. पाण्डेय, 'Excavations at Damdama (1982-1987)', इलाहाबाद विश्वविद्यालय पुरातत्व विभाग
2. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India - ASI) उत्खनन समीक्षा (Indian Archaeology - A Review)
3. डॉ. केनेथ ए. आर. कैनेडी, 'Skeletal Biology of Prehistoric Humans from Damdama' (Cornell University, USA)
Nice 😊 information 🙂 bro
जवाब देंहटाएंThanks for nice information .
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