अभिनंदन (Welcome)

प्रतापगढ़ HUB आधिकारिक संदर्शिका (Official District Directory)

अभिनंदन! बेल्हा-प्रतापगढ़ की पावन धरा पर आपका स्वागत है

उत्तर प्रदेश का 70वां जनपद प्रतापगढ़—मां बेल्हा देवी की असीम अनुकंपा, सई नदी के सुरम्य तट, आंवले की खुशबू, अवधी संस्कृति और ऐतिहासिक गौरव से परिपूर्ण है। इस पृष्ठ पर जनपद के इतिहास, भूगोल, गज़ेटियर, लोक कला, खान-पान, तीर्थ स्थल और परिवहन की संपूर्ण प्रामाणिक जानकारी एक सुव्यवस्थित क्रम में संकलित की गई है।

70वां
उत्तर प्रदेश का जिला
5 तहसीलें
प्रशासनिक प्रभाग
सई नदी तट
मां बेल्हा देवी धाम
आंवला नगरी
वैश्विक पहचान (ODOP)

प्रशासनिक, ऐतिहासिक व भौगोलिक परिदृश्य

जिले का प्रामाणिक इतिहास, ऐतिहासिक गजेटियर, भौगोलिक सीमाएं व पड़ोसी जनपद

इतिहास

उत्तर प्रदेश के 70वें जिले के रूप में स्थापित प्रतापगढ़ का प्राचीन इतिहास, बेल्हा नामकरण की पौराणिक कथा, राजा प्रताप सिंह द्वारा 1617 ई. में रामपुर में किले का निर्माण और प्रशासनिक विकास गाथा।

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आधिकारिक दस्तावेज

ब्रिटिश कालीन ऐतिहासिक अभिलेखों (1800-1900) पर आधारित प्रतापगढ़ जिले का आधिकारिक गजेटियर—प्राचीन रियासतें, परगने, राजस्व बंदोबस्त और ऐतिहासिक तथ्यों का प्रामाणिक संकलन।

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भूगोल

प्रयागराज मंडल में 1858 में गठित प्रतापगढ़ जिले का जीपीएस विस्तार (25°34' से 26°11' उत्तरी अक्षांश व 81°19' से 82°27' पूर्व देशांतर), सई, गंगा व बकुलाही नदियों का जलप्रवाह तंत्र।

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सीमाएं

प्रतापगढ़ की सीमाओं से सटे 5 प्रमुख जिले—उत्तर में सुलतानपुर (35 किमी), दक्षिण में संगम नगरी प्रयागराज (60 किमी), पूर्व में जौनपुर, पश्चिम में अमेठी तथा कौशाम्बी से जुड़ी भौगोलिक कनेक्टिविटी।

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जनजीवन, भाषा, मौसम व आवागमन

अवधी बोली की मिठास, मौसम का मिजाज और सड़क व रेल परिवहन की संपूर्ण व्यवस्था

संवाद

बेल्हा की मिट्टी में रची-बसी अवधी भाषा का मिठास भरा स्वरूप, स्थानीय बोलचाल के रोचक मुहावरे, लोकोक्तियाँ और मानक हिन्दी के साथ अवधी का तुलनात्मक भाषाई विश्लेषण।

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जलवायु

प्रतापगढ़ की ऋतु चक्र व्यवस्था—ग्रीष्म काल का तापमान, मानसूनी वर्षा का आगमन, ठंड के सुहावने दिन और जनपद के प्रमुख कृषि चक्र (रबी, खरीफ व जायद) पर मौसम का प्रभाव।

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परिवहन

मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन (MBDP), चिलबिला, कुंडा, अंतू रेलवे स्टेशन, राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) बस डिपो, और प्रमुख अंतर-जनपदीय राजमार्गों की यात्रा गाइड।

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सामाजिक जीवन

जनपद में सभी वर्गों, जातियों और धर्मों का ऐतिहासिक सौहार्द, गंगा-जमुनी तहज़ीब, मेलों का सांस्कृतिक आयोजन और ग्रामीण जीवन की सादगी व आपसी भाईचारा।

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कला, संस्कृति, खेल व अवधी स्वाद

गुलाबो-सिताबो कठपुतली, ग्रामीण क्रीड़ा और विश्वविख्यात आंवला व अवधी व्यंजन

लोक धरोहर

रानीगंज के नरहरपुर में जन्मे राम निरंजन लाल श्रीवास्तव द्वारा स्थापित विश्वविख्यात गुलाबो-सिताबो कठपुतली विधा, लोक नाट्य, लोकगीत (सोहर, कजरी, बिरहा) और लोक शिल्पकला।

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क्रीड़ा

ग्रामीण जनजीवन में पीढ़ियों से रचे-बसे खेल—दंगल (कुश्ती), कबड्डी, तैराकी, खो-खो, गिल्ली-डंडा और विभिन्न ग्रामीण उत्सवों व मेलों में आयोजित होने वाली रोमांचक प्रतियोगिताएं।

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अवधी स्वाद

आंवला नगरी का मशहूर मुरब्बा, कैंडी, अचार, लड्डू के अलावा बाटी-चोखा, बेल्हा के देशी घी के समोसे, बेढ़ई-जलेबी और अवधी रसोइयों की पारंपरिक लाजवाब मिठास।

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धरोहर

जनपद के ग्रामीण अंचलों में प्रचलित हस्तशिल्प, स्थानीय मेले, साप्ताहिक हाट-बाज़ार, और लुप्तप्राय लोक विधाओं के संरक्षण से जुड़े रोचक व प्रेरणादायक संस्मरण।

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तीर्थ, दर्शनीय स्थल व गौरवशाली विभूतियाँ

पावन शक्तिपीठ, ऐतिहासिक मंदिर और विश्व में जनपद का नाम रोशन करने वाली हस्तियां

तीर्थ व पर्यटन

सई तट पर मां बेल्हा देवी मंदिर, कुंडा में जगद्गुरु कृपालु जी का भव्य भक्ति मंदिर मनगढ़, विश्वनाथगंज का दुर्लभ शनि धाम व भयहरणनाथ धाम, बाबा घुइसरनाथ धाम और हौदेश्वर नाथ तीर्थ।

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गौरव

मधुशाला के रचयिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन, स्वतंत्रता सेनानी बाबू गुलाब सिंह, पं. मुनीश्वर दत्त उपाध्याय, राजनीति व समाज सेवा में अग्रणी कुंडा के राजा भैया, और प्रसिद्ध साहित्यकार।

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