प्रतापवासिनी माँ शीतला देवी धाम, कटरा मेदनीगंज: आस्था, शहादत और विकास की एक रोमांचक कहानी
उत्तर प्रदेश का प्रतापगढ़ जनपद इतिहास के पन्नों में सिर्फ अपनी आंवले की महक या साहित्यिक पहचान के लिए ही दर्ज नहीं है, बल्कि यह वह स्वाभिमानी धरा है जहाँ हर मोड़ पर आस्था की गूँज और शहादत की अनकही गाथाएँ बिखरी पड़ी हैं। इसी जनपद के ऐतिहासिक कस्बे कटरा मेदनीगंज में स्थित 'प्रतापवासिनी माँ शीतला देवी धाम' आज पूरे पूर्वांचल में आस्था, आधुनिक वास्तुकला और शिक्षा के एक दिव्य संगम के रूप में उभर चुका है।
🌸 माता का बुलावा: एक ऐसा आध्यात्मिक अहसास जो खुद खींच लाता है
कहते हैं कि तीर्थों की यात्रा इंसान अपनी मर्ज़ी से कभी तय नहीं करता। आप चाहे कितनी भी योजनाएं बना लें, डायरी में तारीखें लिख लें या गाड़ियों में पेट्रोल भरवा लें—जब तक उस पावन चौखट से बुलावा नहीं आता, कदम उस दिशा में उठ ही नहीं सकते। हमारे सनातन धर्म में इस दिव्य अहसास को एक बहुत ही खूबसूरत नाम दिया गया है—"माता का बुलावा"।
प्रतापगढ़ की माटी में जब आप कदम रखते हैं, तो हवा में घुली वही दिव्य पुकार आपको कटरा मेदनीगंज के इस भव्य धाम की तरफ खींच ले जाती है। यहाँ पहुँचते ही मन की बेचैनी शांत हो जाती है और एक अलौकिक सुकून दिल को छू लेता है।
⚔️ कटरा मेदनीगंज की ज़मीन: 1857 की बगावत और खून से लिखा गया इतिहास
इससे पहले कि हम आज के भव्य मंदिर और उसके खूबसूरत पार्कों की बात करें, हमें इतिहास की उस गहरी और रोमांचक सुरंग में जाना होगा जहाँ से इस जगह का नाम पड़ा। यह कहानी सिर्फ एक बाज़ार या कस्बे के बसने की नहीं है, बल्कि देश की आज़ादी के लिए दी गई एक बहुत बड़ी और खामोश कुर्बानी की है। इस कहानी को जाने बिना कटरा मेदनीगंज को समझना नामुमकिन है।
बात साल 1857 की है। पूरे भारत में अंग्रेज़ों के खिलाफ बगावत की आग भड़क उठी थी। प्रतापगढ़ ज़िले के दक्षिणी हिस्से में एक स्वाभिमानी रियासत हुआ करती थी—तरौल (मानधाता क्षेत्र)। यहाँ के तालुकेदार थे सोमवंशी राजपूत खानदान के बाबू गुलाब सिंह और उनके छोटे भाई बाबू मेदनी सिंह। जब अंग्रेज़ों की भारी हथियारों से लैस फौज इलाहाबाद (प्रयागराज) से लखनऊ की तरफ कूच कर रही थी, तब इन वीर भाइयों ने बकुलाही नदी के बीहड़ों में गोरिल्ला युद्ध छेड़कर फिरंगियों के छक्के छुड़ा दिए थे।
बकुलाही नदी के किनारे हुए उस भीषण संग्राम में बाबू मेदनी सिंह ने अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। इस अदम्य साहस और शहादत की याद में ही आगे चलकर इस ऐतिहासिक व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र का नाम 'कटरा मेदनीगंज' रखा गया।
यहाँ की 19वीं सदी की पुरानी हवेलियाँ, प्राचीन इमारतें और सँकरी गलियाँ आज भी उस दौर की शौर्य गाथाओं को अपने सीने में समेटे हुए खामोशी से खड़ी हैं। जब कोई इतिहास प्रेमी यहाँ की ज़मीन पर कदम रखता है, तो उसे अहसास होता है कि यह साधारण माटी नहीं, बल्कि आजादी के परवानों के रक्त से सिंचित पावन भूमि है।
🌺 प्रतापवासिनी शीतला देवी मंदिर का निर्माण: जब आसमान से बरसे फूल
इतने गौरवशाली और शहादत वाले इतिहास से भरी ज़मीन पर जब माँ शीतला देवी के भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हुआ, तो वह नज़ारा भी किसी उत्सव और चमत्कार से कम नहीं था। इस आधुनिक, बड़े और भव्य मंदिर को बनवाने और इसे एक बड़े धाम का रूप देने का पूरा श्रेय प्रतापगढ़ के पूर्व सांसद एवं विधायक संगम लाल गुप्ता और उनके द्वारा स्थापित 'माता शीतला देवी पब्लिक ट्रस्ट' को जाता है।
यह निर्माण सिर्फ एक मंदिर का नहीं था, बल्कि पूरे कटरा मेदनीगंज की तकदीर बदलने वाले एक आध्यात्मिक और शैक्षणिक क्रांति की शुरुआत थी। ट्रस्ट ने योजनाबद्ध तरीके से मंदिर और स्कूल के संयुक्त परिसर की नींव रखी, जिसने इस अंचल को नई पहचान दी।
🏛️ मंदिर की अनोखी बनावट और गर्भगृह का रहस्य
यदि कोई वास्तुकार या प्राचीन इतिहास का शोधकर्ता यहाँ आए, तो उसे प्राचीनता और आधुनिकता का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है। मंदिर में प्रवेश के लिए दो भव्य मुख्य द्वार बनाए गए हैं:
- पहला दरवाज़ा (हाईवे की तरफ से): यह रास्ता सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) की ओर से आता है। इस मार्ग से आते हुए श्रद्धालु हरे-भरे सुसज्जित उद्यानों, फूलों और वृक्षों की छाया से गुज़रते हुए मुख्य मंदिर तक पहुँचते हैं, जो सफर की सारी थकान मिटा देता है।
- दूसरा दरवाज़ा (स्कूल की तरफ से): यह रास्ता संगम इंटरनेशनल स्कूल परिसर की ओर से खुलता है। यहाँ से प्रवेश करते ही मंदिर के गगनचुंबी शिखर और उसकी स्थापत्य भव्यता का संपूर्ण विहंगम दृश्य एक साथ दृष्टिगोचर होता है।
मंदिर के गर्भगृह में माँ शीतला देवी की पाषाण प्रतिमा स्थापित है। लेकिन जो बात इतिहासकारों और पुरातत्वविदों को सबसे अधिक आकर्षित करती है, वह है माता के चरणों के ठीक नीचे स्थापित एक अति प्राचीन नक्काशीदार पत्थर (शिलालेख)। बुजुर्गों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह पत्थर सदियों पुराना है और इसका संबंध इस क्षेत्र के किसी प्राचीन धार्मिक या पुरातात्विक केंद्र से है।
मुख्य गर्भगृह के अलावा मंदिर परिसर में भगवान नरसिंह की रौद्र व रक्षक प्रतिमा, परिसर के प्रांगण में पवनपुत्र श्री हनुमान जी की विशालकाय मूर्ति, सुंदर ध्यान पार्क और एक पावन जल कुंड (सरोवर) का निर्माण कराया गया है, जहाँ भक्तजन आचमन और ध्यान कर सकें।
🏫 एक नई सोच की शुरुआत: जहाँ धर्म और शिक्षा आपस में मिलते हैं
आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि जहां मंदिर होते हैं, वहां केवल धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य तक ही बातें सीमित रह जाती हैं। लेकिन कटरा मेदनीगंज में एक सर्वथा नई और क्रांतिकारी सोच देखने को मिली। ट्रस्ट के संस्थापकों का मानना था कि "सच्ची पूजा केवल अगरबत्ती जलाने में नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के हाथों में ज्ञान की मशाल थमाने में है।"
इसी प्रगतिशील दृष्टिकोण के तहत मंदिर परिसर से सटकर 'संगम इंटरनेशनल स्कूल' की नींव रखी गई, जिसने ग्रामीण अंचल के बच्चों को महानगरों जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उनके घर के पास उपलब्ध करा दी।
🎒 संगम इंटरनेशनल स्कूल: प्राचीन गुरुकुल और 21वीं सदी की तकनीक का अनूठा संगम
1 जून 2011 को स्थापित यह स्कूल आज केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE, New Delhi) से सम्बद्ध (Affiliation No: 2131652) एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान बन चुका है। यहाँ कक्षा 1 से 12वीं तक विज्ञान और वाणिज्य की उत्कृष्ट शिक्षा दी जाती है।
स्कूल के प्रिंसिपल श्री संजय कुमार शर्मा और शिक्षकों का ध्येय है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों में चरित्र, संस्कार, आधुनिक विज्ञान और भारतीय संस्कृति का गहरा बोध पैदा करे। विशाल लाइब्रेरी, भौतिक-रसायन-जीवविज्ञान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, कंप्यूटर लैब, खेल-कूद का विशाल मैदान और सुरक्षित बस सेवा इसे ग्रामीण क्षेत्र का अग्रणी विद्यालय बनाती है।
👤 इस पूरे विकास के पीछे खड़े इंसान: संगम लाल गुप्ता का सफर
यदि कोई शोधकर्ता यह जानना चाहे कि कटरा मेदनीगंज जैसे शांत कस्बे में इतना बड़ा धार्मिक और शैक्षणिक बदलाव कैसे संभव हुआ, तो उसका उत्तर एक ही नाम में सिमट जाता है—संगम लाल गुप्ता।
1 अप्रैल 1971 को कटरा मेदनीगंज के एक बेहद साधारण परिवार में जन्मे संगम लाल गुप्ता का बचपन भारी अभावों और आर्थिक कठिनाइयों में बीता। एक समय ऐसा भी आया जब परिवार चलाने के लिए उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़कर मुंबई की मायानगरी का रुख करना पड़ा। वहाँ कड़े संघर्ष और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने व्यवसाय जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
सफलता के शिखर पर पहुँचकर भी वे अपनी जन्मभूमि की माटी को नहीं भूले। वे वापस प्रतापगढ़ लौटे, 2017 में प्रतापगढ़ सदर से विधायक और 2019 में प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। राजनीति के साथ-साथ उन्होंने अपने गांव कटरा मेदनीगंज में माँ शीतला देवी धाम का नवनिर्माण कराया, संगम इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना की और इस पिछड़े इलाके को विकास के राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया।
🎉 मंदिर से जुड़े प्रमुख आयोजन, मेले और त्यौहार
प्रतापवासिनी धाम में वैसे तो नित्य प्रति सुबह-शाम वैदिक मंत्रोच्चार, आरती की घंटियाँ और शंखनाद होता है, लेकिन कुछ विशेष धार्मिक पर्वों पर यहाँ का वातावरण अत्यंत मनोहारी और भक्तिमय हो उठता है:
- चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि: साल में दोनों नवरात्रि के पावन नौ दिनों में प्रतापगढ़ सहित प्रयागराज, रायबरेली, सुल्तानपुर और अमेठी से लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शनार्थ उमड़ते हैं। मंदिर को जगमग रोशनी और देशी-विदेशी फूलों से सजाया जाता है और विशाल मेले का आयोजन होता है।
- श्री कृष्ण जन्माष्टमी: चूंकि मंदिर से सटा हुआ विद्यालय है, अतः ट्रस्ट और विद्यालय परिवार द्वारा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भव्य झांकियाँ, मटकी फोड़ प्रतियोगिता और भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
- शीतला अष्टमी व बसौड़ा पर्व: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी (बसौड़ा) पर माता को बासी पकवानों का पारंपरिक भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे चेचक, खसरा और गर्मी जनित व्याधियाँ दूर होती हैं।
- मुंडन एवं संस्कार उत्सव: पूर्वांचल के विभिन्न अंचलों से परिवार अपने नवजात शिशुओं के मुंडन संस्कार और कुलदेवी पूजन हेतु यहाँ आते हैं, जिससे परिसर में निरंतर मंगल गीत गूँजते रहते हैं।
🎥 माँ शीतला देवी धाम: दिव्य दर्शन एवं आरती वीडियो (Video Darshan)
नीचे दिए गए वीडियो में प्रतापवासिनी माँ शीतला देवी धाम, कटरा मेदनीगंज के भव्य मंदिर परिसर, वास्तुकला और दिव्य आरती का जीवंत दर्शन करें:
🚗 रोमांचक यात्रा: यहाँ कैसे पहुँचें? (How to Reach)
यह पूरी कहानी पढ़कर अगर आपके मन में भी "माता का बुलावा" महसूस हो रहा है और आप दर्शन हेतु यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यहाँ पहुँचना बेहद सुगम है। आइए, यात्रा मार्ग को चरणबद्ध तरीके से समझें:
🛣️ प्रतापगढ़ शहर (घंटाघर) से सड़क मार्ग (Step-by-Step Route):
🚆 रेल एवं बस कनेक्टिविटी (Railway & Bus Distance Table):
| यातायात का साधन | नज़दीकी स्टेशन / स्टैंड का नाम | मंदिर से दूरी (लगभग) |
|---|---|---|
| ट्रेन (Railway) | प्रतापगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन (PBH) | 6.55 कि.मी. |
| ट्रेन (Railway) | रानीगंज रेलवे स्टेशन (RANI) | 11.89 कि.मी. |
| बस (Bus Stand) | जनता आभा ट्रैवल्स बस स्टैंड | 5.92 कि.मी. |
| प्राइवेट बस सेवा | पूर्वांचल संजय ट्रैवल्स, सिंह टूर एंड ट्रैवल्स | कटरा के नज़दीक उपलब्ध |
नोट: रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से बाहर निकलते ही आपको कटरा मेदनीगंज के लिए ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा प्रचुर मात्रा में मिल जाते हैं। निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज (बमरौली) लगभग 65 किमी एवं लखनऊ (अमौसी) लगभग 145 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️ गूगल मैप्स: शीतला देवी धाम पहुँचने का लाइव नेविगेशन रूट
🧭 आसपास के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थल (Nearby Attractions)
प्रतापगढ़ को संतों, शूरवीरों और सिद्ध पीठों की पावन भूमि कहा जाता है। यदि आप माँ शीतला देवी धाम के दर्शन हेतु आ रहे हैं, तो अपनी यात्रा सूची में आसपास के इन प्रमुख ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों को भी अवश्य शामिल करें:
| स्थल का नाम | महत्व / संक्षिप्त विवरण | मंदिर से दूरी (लगभग) |
|---|---|---|
| श्री दिगंबर जैन मंदिर | जैन धर्म का अत्यंत शांतिपूर्ण, पवित्र एवं प्राचीन आराधना स्थल | महज़ 450 मीटर |
| कटरा मेदनीगंज हवेली | 19वीं सदी की ऐतिहासिक शाही हवेली, जो इतिहास प्रेमियों की विशेष पसंद है | पैदल दूरी (कस्बे में ही) |
| माँ बेल्हा देवी धाम | सई नदी तट पर स्थित प्रतापगढ़ का सर्वोच्च शक्तिपीठ, जिसके नाम पर बेल्हा शहर है | 7.7 कि.मी. |
| शनि देव धाम (विश्वनाथगंज) | बकुलाही तट पर कुशफरा के जंगलों में भगवान शनि का जाग्रत व चमत्कारी धाम | 7.59 कि.मी. |
| बाबा बेलखरनाथ धाम | सई नदी के किनारे भगवान शिव का सिद्ध व अत्यंत प्राचीन तीर्थ | 17.65 कि.मी. |
| भयहरणनाथ धाम | महाभारतकालीन शिवलिंग (पांडव स्थापित)। 1857 के नायक बाबू गुलाब सिंह यहाँ नित्य पूजन करते थे | प्रतापगढ़ ज़िला (कटरा गुलाब सिंह) |
| भक्ति मंदिर, मनगढ़ | जगद्गुरु कृपालु जी महाराज की जन्मस्थली, नक्काशीदार संगमरमर का अलौकिक प्रेम धाम | कुंडा, प्रतापगढ़ |
| बाबा घुइसरनाथ धाम | सई तट पर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग समतुल्य विख्यात शिव धाम | लालगंज अझारा, प्रतापगढ़ |
(नोट: ऊपर दी गई दूरियाँ चुने गए मार्ग एवं तात्कालिक यातायात के अनुसार थोड़ी बहुत परिवर्तित हो सकती हैं।)
📞 संपर्क सूत्र और प्रमाणित जानकारियाँ (Complete Directory)
यदि आप मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, अनुष्ठान अथवा संगम इंटरनेशनल स्कूल में प्रवेश (Admission) संबंधी प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे दी गई अधिकृत डायरेक्टरी का उपयोग कर सकते हैं:
1. मुख्य मंदिर और स्कूल ट्रस्ट के संपर्क (Temple & School Contacts)
| जानकारी का प्रकार | संपर्क विवरण (Official Contact Details) |
|---|---|
| कार्यालय का पता (Address) | माता शीतला देवी ट्रस्ट, संगम इंटरनेशनल स्कूल, कटरा मेदनीगंज, प्रतापगढ़ (यू.पी.) - 230131 |
| कार्यालय फोन (Landline) | 05342 - 244600 |
| मोबाइल नंबर 1 | +91 9792669933 |
| मोबाइल नंबर 2 | +91 8052737497 |
| मोबाइल नंबर 3 | +91 8052737292 |
| आधिकारिक ई-मेल (E-mail) | sangaminternationalschool@gmail.com |
| वेबसाइट | www.sangaminternationalschool.org |
| संस्थापक / अध्यक्ष | संगम लाल गुप्ता (संपर्क: 09323619169) |
| स्कूल प्रिंसिपल | श्री संजय कुमार शर्मा |
2. आसपास के अन्य छोटे शीतला देवी मंदिर (लोकल बाज़ार के अंदर)
कटरा मेदनीगंज बाज़ार में एक और पुराना और छोटा 'माता शीतला देवी मंदिर' भी है, जो स्थानीय निवासियों की नित्य पूजा-अर्चना का केंद्र है। यहाँ प्रातः 6:00 बजे से दर्शन प्रारंभ हो जाते हैं:
| जानकारी का प्रकार | संपर्क विवरण (Contact Details) |
|---|---|
| स्थान / पता (Address) | माता शीतला देवी स्मॉल टेम्पल, मुख्य बाज़ार, कटरा मेदनीगंज, प्रतापगढ़ |
| संपर्क नंबर | +91 7376711732 |
| दर्शन समय | प्रतिदिन प्रातः 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक |
3. प्रशासनिक और आपातकालीन नंबर (शोधकर्ताओं और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए)
बाहर से आने वाले पर्यटकों, शोधकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा हेतु जनपद प्रतापगढ़ के प्रमुख प्रशासनिक हेल्पलाइन नंबर:
| अधिकारी / विभाग | हेल्पलाइन / संपर्क नंबर |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश पुलिस (आपातकालीन) | 112 |
| पुलिस अधीक्षक (SP प्रतापगढ़) | 9454400300 |
| जिलाधिकारी कार्यालय (DM Office) | 05342-220401 |
| मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO Office) | 05342-220507 |
| एम्बुलेंस आपात सेवा | 108 |
| महिला पावर लाइन (Women Helpline) | 1090 |
📸 माँ शीतला देवी धाम: विहंगम फोटो दर्शन (Photo Gallery)
माँ शीतला देवी धाम के आध्यात्मिक परिसर, प्राकृतिक सौंदर्य और नयनाभिराम दृश्यों का विशेष छायाचित्र संग्रह (डेस्कटॉप पर 2-कॉलम एवं मोबाइल पर पूर्ण व्यवस्थित ग्रिड):
📊 एक गहरा शोध: समाज और रोज़गार पर पड़ने वाला प्रभाव (Socio-Economic Impact)
एक सामान्य धार्मिक यात्रा वृत्तांत से ऊपर उठकर, यदि हम एक समाजशास्त्री और अर्थशास्त्री के दृष्टिकोण से इस धाम और शैक्षणिक परिसर का विश्लेषण करें, तो क्षेत्र में आए युगांतरकारी परिवर्तनों की स्पष्ट तस्वीर उभरती है:
📜 भूले हुए गौरवशाली इतिहास का पुनर्जागरण
बाबू मेदनी सिंह और बाबू गुलाब सिंह जैसे 1857 के महान क्रांतिकारियों को राष्ट्रीय इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में वह स्थान नहीं मिल सका जिसके वे हकदार थे। कटरा मेदनीगंज के इस धाम ने उस विस्मृत इतिहास को जन-जन की चेतना में पुनः जीवित किया है। आज युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों के आत्मोत्सर्ग और स्वाभिमान पर गर्व करती है।
💼 ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोज़गार में अभूतपूर्व उछाल
धार्मिक पर्यटन और संगम इंटरनेशनल स्कूल के विशाल छात्र समूह के कारण कटरा मेदनीगंज बाज़ार में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है। फूल-माला, प्रसाद, पूजा-सामग्री, मिष्ठान, परिवहन, स्टेशनरी, वर्दी और स्थानीय खान-पान के दर्जनों नए व्यवसायों से सैकड़ों परिवारों को रोज़गार मिला है।
🏡 बुनियादी ढाँचा एवं रियल एस्टेट का विस्तार
रायबरेली-प्रतापगढ़ मार्ग पर होने और एक उत्कृष्ट स्कूल व पावन धाम के स्थापित होने से आसपास की ज़मीनों के मूल्य में वृद्धि हुई है। बेहतर सड़कें, स्ट्रीट लाइटें, पेयजल और परिवहन के साधन सुलभ होने से कटरा मेदनीगंज एक आधुनिक उपनगर का रूप ले रहा है।
🌸 नारी चेतना एवं मानसिक शांति का केंद्र
माँ शीतला वात्सल्य, आरोग्य और शक्ति की अधिष्ठात्री हैं। ग्रामीण परिवेश की माताओं और बहनों के लिए यह धाम न केवल प्रार्थना का स्थल है, बल्कि अपनी सामाजिक सीमाओं से बाहर निकलकर आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्राप्त करने का एक सुरक्षित आश्रय भी है।
✍️ कहानी का सार: पत्थर, ज़मीन और विश्वास की गूँज
यदि इस संपूर्ण यात्रा को कुछ शब्दों में पिरोया जाए, तो 'प्रतापवासिनी माँ शीतला देवी धाम, कटरा मेदनीगंज' महज़ ईंट, सीमेंट और पत्थरों की कोई निर्जीव इमारत नहीं है। यह प्रतापगढ़ की स्वाभिमानी माटी पर खड़ा एक ऐसा जीवंत प्रतीक है, जिसकी नींव में 1857 के अमर शहीदों का रक्त, बाबू मेदनी सिंह का अदम्य शौर्य और माँ शीतला की अनन्य करुणा समाहित है।
एक ओर यहाँ की पावन भूमि हमें राष्ट्रीय स्वाभिमान और क्रांति की प्रेरणा देती है, तो दूसरी ओर गर्भगृह में विराजित प्राचीन शिलाखंड हमें हमारी सहस्राब्दियों पुरानी सनातन संस्कृति के गौरव से जोड़ता है। संगम इंटरनेशनल स्कूल के रूप में ज्ञान का प्रकाश नई पीढ़ी के भविष्य को संवार रहा है।
यदि आप जीवन के संघर्षों से थके हैं और आत्मिक शांति की तलाश में हैं, तो कटरा मेदनीगंज में माता का बुलावा आपका इंतज़ार कर रहा है। अगली बार जब भी आप रायबरेली-लखनऊ हाईवे से गुज़रें, भुपियामऊ के पास अपनी गाड़ी की गति धीमी कीजिए और कटरा मेदनीगंज में माँ शीतला के चरणों में शीश नवाकर इस रोमांचक इतिहास और आस्था का प्रत्यक्ष अनुभव अवश्य कीजिए।