राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज प्रतापगढ़ (Government Engineering College Pratapgarh)

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⚙️ उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा विभाग (राजकीय तकनीकी संस्थान)

भारत रत्न बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रतापगढ़: माटी से मशीन तक की एक शानदार कहानी

Bharat Ratna Babasaheb Bhimrao Ambedkar Rajkiya Engineering College, Pratapgarh (REC Pratapgarh) - इतिहास, चालकपुर बदफरोशान स्थायी परिसर, B.Tech पाठ्यक्रम, JEE Main कट-ऑफ, फैकल्टी डायरेक्ट्री और प्लेसमेंट की प्रामाणिक पड़ताल।
📌 मुख्य अवलोकन एवं त्वरित तथ्य (REC Pratapgarh At a Glance)
संस्थान का पूरा नाम
भारत रत्न बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रतापगढ़
स्थापना / शासनादेश
2 अगस्त 2023 (सत्र 2023-24 से क्रियाशील)
स्थायी कैंपस शिफ्टिंग
1 अगस्त 2025 (चालकपुर बदफरोशान, रानीगंज)
संबद्धता एवं मान्यता
AKTU लखनऊ (कॉलेज कोड: 1216) एवं AICTE नई दिल्ली
बी.टेक शाखाएं एवं कुल सीटें
4 प्रमुख शाखाएं (CSE, ME, CE, EE) - कुल 240 सीटें
सटीक पता एवं पिन कोड
गाँव: चालकपुर बदफरोशान, पोस्ट: दांदूपुर (मुफ़रिद), रानीगंज, प्रतापगढ़ - 230127

ज़रा कल्पना कीजिए एक ऐसे पिता की, जो दिन भर खेतों में पसीना बहाता है या किसी कारखाने में हथौड़ा चलाता है। जब वह शाम को थका-हारा घर लौटता है, तो उसकी आँखों में सिर्फ एक ही सपना होता है— कि उसका बच्चा पढ़-लिखकर एक बड़ा अधिकारी या इंजीनियर बने, ताकि उसे यह गरीबी की ज़िंदगी दोबारा न जीनी पड़े। लेकिन जैसे ही वह बड़े शहरों के प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की लाखों रुपये की फीस और वहाँ तक पहुँचने के खर्च के बारे में सोचता है, तो उसका सपना वहीं टूट जाता है।

लेकिन अब, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले में एक ऐसा चमत्कार हुआ है जिसने इस आम आदमी के सपने को फिर से ज़िंदा कर दिया है। हरे-भरे खेतों, आम और आंवले के बागों के बीच एक ऐसी शानदार इमारत खड़ी हो गई है, जहाँ से अब सिर्फ फसलें ही नहीं, बल्कि देश का भविष्य गढ़ा जा रहा है। इस नए और चमचमाते विद्या-मंदिर का नाम है— 'भारत रत्न बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रतापगढ़' ।

यह लेख कोई आम सरकारी दस्तावेज़ या नीरस रिपोर्ट नहीं है। यह एक ऐसी रोमांचक यात्रा है, जो आपको बताएगी कि कैसे एक छोटे से गाँव से उठकर तकनीक और विज्ञान की दुनिया में इस संस्थान ने अपना परचम लहराना शुरू कर दिया है। इस कहानी को इतनी आसान और आम बोलचाल की भाषा में पिरोया गया है कि खेत में काम करने वाला एक किसान या मज़दूर भी इसे पढ़कर समझ सके कि उसके बच्चों के लिए कितनी बड़ी सुविधा उनके दरवाज़े पर आ खड़ी हुई है। साथ ही, इसमें दिए गए आंकड़े, तारीखें, और संपर्क सूत्र इतने सटीक और प्रामाणिक हैं कि कोई बड़ा अधिकारी या मंत्रालय का व्यक्ति भी इसे एक प्रमाणित दस्तावेज़ मानकर पूरी गंभीरता से ले सकता है।

तो आइए, शुरू से शुरू करते हैं इस ज्ञान के महाकुंभ की शानदार विकास गाथा को।

Government Engineering College, Pratapgarh
चित्र 1: भारत रत्न बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रतापगढ़ का मुख्य परिसर।

एक महान सोच का जन्म और संघर्ष के दिन

किसी भी बड़े बदलाव की शुरुआत हमेशा एक नेक सोच से होती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह गहराई से महसूस किया कि तकनीकी और उच्च शिक्षा सिर्फ बड़े शहरों, जैसे लखनऊ, कानपुर या नोएडा की ऊंची इमारतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। गाँव-देहात और छोटे शहरों की मिट्टी में भी प्रतिभाएं छिपी हैं, बस उन्हें तराशने की ज़रूरत है। इसी दूरदर्शी सोच के तहत, राज्य सरकार ने बस्ती, गोंडा, मिर्जापुर और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज (राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज) स्थापित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया ।

इस फैसले को ज़मीन पर उतारने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने 2 अगस्त 2023 को एक आधिकारिक आदेश (मेमो नंबर: 2053/16-1-2023-14(54)/2014) जारी किया। इसी आदेश के साथ प्रतापगढ़ ज़िले में शैक्षणिक सत्र 2023-24 से इस इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना को औपचारिक तौर पर हरी झंडी मिल गई ।

शुरुआत में इस संस्थान का नाम सिर्फ 'राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रतापगढ़' (REC Pratapgarh) रखा गया था। लेकिन बाद में सरकार को लगा कि शिक्षा के इस बड़े मंदिर का नाम किसी ऐसी महान हस्ती के नाम पर होना चाहिए, जिसने समाज के हर कमज़ोर वर्ग को शिक्षा का अधिकार दिलाया हो। इसलिए, राज्य सरकार के एक विशेष निर्णय के बाद, इस कॉलेज का नाम बदलकर 'भारत रत्न बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रतापगढ़' कर दिया गया । यह नया नाम सिर्फ अक्षरों का जोड़ नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि यहाँ शिक्षा बिना किसी जाति, धर्म या आर्थिक भेदभाव के हर उस होनहार बच्चे को मिलेगी जो अपनी मेहनत से आसमान छूना चाहता है।

दो साल का 'वनवास' और अपनी ज़मीन पर वापसी

जब अगस्त 2023 में कॉलेज को मंजूरी मिली, तब प्रतापगढ़ में इसकी इमारतें और प्रयोगशालाएं तैयार नहीं थीं। लेकिन एक बार जब ज्ञान का दीप जलाने का फैसला हो जाए, तो पढ़ाई को रोका नहीं जा सकता। इसलिए सरकार ने एक बहुत ही सूझबूझ भरा फैसला किया। यह तय हुआ कि जब तक प्रतापगढ़ में कॉलेज की अपनी भव्य इमारत बनकर पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती, तब तक यहाँ के बच्चों की पढ़ाई सुल्तानपुर के बेहद मशहूर और पुराने 'कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी' (KNIT) में कराई जाएगी ।

यह सफर बिल्कुल वैसा ही था जैसे कोई योद्धा युद्ध के मैदान में जाने से पहले किसी दूसरे गुरु के आश्रम में जाकर कठोर प्रशिक्षण लेता है। पहले दो बैच के छात्रों ने शैक्षणिक सत्र 2023-24 और 2024-25 की पूरी पढ़ाई सुल्तानपुर के इसी परिसर में रहकर की । यह एक तरह का 'वनवास' था, जहाँ बच्चे और शिक्षक अपने नए घर के बनने का इंतज़ार कर रहे थे।

इधर प्रतापगढ़ में दिन-रात काम चल रहा था। ईंटों पर ईंटें रखी जा रही थीं, प्रयोगशालाओं में तार बिछाए जा रहे थे, और हॉस्टल के कमरे आकार ले रहे थे। आखिरकार वह ऐतिहासिक दिन आ ही गया जिसका सबको बेसब्री से इंतज़ार था। 26 जुलाई 2025 को उत्तर प्रदेश सरकार और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) ने एक और आधिकारिक आदेश (अ0क0प्रा0वि0/कुप0का0/2025/14111(i)) जारी किया । इस आदेश के तहत यह घोषणा की गई कि 1 अगस्त 2025 से कॉलेज पूरी तरह से प्रतापगढ़ के अपने स्थायी (परमानेंट) नवनिर्मित कैंपस में शिफ्ट हो जाएगा । इस तरह, शैक्षणिक सत्र 2025-26 की शानदार शुरुआत इसी नई और अपनी धरती से हुई, जो इस कॉलेज के इतिहास का एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है।

भूगोल और माटी की महक: कहाँ बसा है यह विद्या का संसार?

अब मन में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि यह शानदार कॉलेज प्रतापगढ़ में आखिर है कहाँ? शहर की चकाचौंध और शोर-शराबे से दूर, एकदम शांति और प्राकृतिक हरियाली के बीच इस कॉलेज को स्थापित किया गया है ताकि बच्चे बिना किसी भटकाव के अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।

इस कॉलेज का पूरा और सटीक पता इस प्रकार है: गाँव: चालकपुर बदफरोशान पोस्ट: दांदूपुर (मुफ़रिद) तहसील: रानीगंज ज़िला: प्रतापगढ़ - 230127 (उत्तर प्रदेश)

चालकपुर बदफरोशान: एक छोटे से गाँव की बड़ी कहानी

जिस गाँव में यह कॉलेज बना है, उसका अपना एक प्यारा सा इतिहास और दिलचस्प भूगोल है। 'चालकपुर बदफरोशान' गाँव रानीगंज तहसील के अंतर्गत आता है और इसकी अपनी ग्राम पंचायत 'गांगपाटी' है । यह गाँव प्रतापगढ़ ज़िला मुख्यालय से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर बसा है, जहाँ पहुँचने में आम तौर पर सड़क के रास्ते 15 से 30 मिनट का समय लगता है । वहीं रानीगंज तहसील मुख्यालय से इसकी दूरी लगभग 25 किलोमीटर है ।

साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो इस गाँव का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल महज़ 105.65 हेक्टेयर है । उस समय यहाँ की कुल आबादी सिर्फ 697 थी, जिसमें 377 पुरुष और 320 महिलाएँ शामिल थीं, और पूरा गाँव महज़ 92 परिवारों का एक छोटा सा कुनबा था । लेकिन इस गाँव की सबसे खास और चौंकाने वाली बात इसकी साक्षरता दर (पढ़े-लिखे लोगों की संख्या) थी। साल 2011 में ही इस गाँव की कुल साक्षरता दर 90.76% थी, जिसमें पुरुषों की साक्षरता 96.91% और महिलाओं की साक्षरता 83.39% थी ।

ज़रा गहराई से सोचिए, जिस गाँव के लोग पहले से ही पढ़ाई-लिखाई को इतना ज़्यादा महत्व देते हों, वहीं पर प्रकृति और सरकार ने मिलकर इतना बड़ा इंजीनियरिंग कॉलेज बना दिया। यह गाँव अब सिर्फ एक गाँव नहीं रहा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के तकनीकी ज्ञान का एक नया और धड़कता हुआ केंद्र बन चुका है। इसके आस-पास चौखरा (0.84 किमी), शिवसत (1.39 किमी), और कादीपुर (1.42 किमी) जैसे छोटे-छोटे गाँव बसे हैं, जिनके बच्चों के लिए यह कॉलेज अब एक उम्मीद की किरण बन गया है ।

यहाँ कैसे पहुँचें? (परिवहन और रास्ते)

अगर कोई मज़दूर, किसान, बाहर से आने वाला छात्र या कोई सरकारी अधिकारी इस कॉलेज में आना चाहे, तो यहाँ पहुँचना बेहद आसान है। सड़क मार्ग की बात करें तो, गाँव तक पक्की और हर मौसम में चालू रहने वाली (All-weather) बेहतरीन सड़कें बनी हुई हैं । प्रतापगढ़ शहर से ऑटो या शेयरिंग वाहन आसानी से मिल जाते हैं जो सीधे कॉलेज के गेट तक छोड़ते हैं । रेल मार्ग के नज़रिए से, जो लोग ट्रेन से सफर करना चाहते हैं, उनके लिए सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन 'प्रतापगढ़ जंक्शन' (Partapgarh Jn) है, जो कॉलेज से सिर्फ 4 से 5 किलोमीटर के दायरे में है । प्रतापगढ़ स्टेशन विभिन्न महत्वपूर्ण रेल रूटों के माध्यम से लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों से सीधा जुड़ा हुआ है । अगर कोई हवाई जहाज़ से आना चाहे, तो सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा प्रयागराज (इलाहाबाद एयरपोर्ट) है, जो यहाँ से लगभग 50 किलोमीटर की हवाई (सीधी) दूरी पर स्थित है ।

📍 गूगल मैप पर REC प्रतापगढ़ की सटीक अवस्थिति (चालकपुर बदफरोशान, रानीगंज)
मानचित्र: गूगल मैप पर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रतापगढ़ (REC Pratapgarh) की भौगोलिक अवस्थिति।

सपनों का महल: परिसर की भव्यता और बुनियादी ढांचा

जब कोई गाँव का इंसान या कोई छात्र पहली बार इस कॉलेज के मुख्य द्वार से अंदर कदम रखता है, तो उसे एक पल के लिए महसूस होता है कि वह किसी महानगर के बड़े और महंगे प्राइवेट कॉलेज में आ गया है। इस पूरे परिसर (कैंपस) को 'ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन' (AICTE) के सबसे कड़े नियमों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है ।

कैंपस के अंदर घुसते ही सबसे पहले एक बहुत ही शानदार प्रशासनिक भवन (Administrative Building) दिखाई देता है, जहाँ से पूरे कॉलेज का कामकाज संभाला जाता है। इसके साथ ही एक विशाल सेंट्रल लॉबी और हर इंजीनियरिंग विभाग (डिपार्टमेंट) के लिए अलग-अलग अत्याधुनिक इमारतें बनाई गई हैं ।

राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज प्रतापगढ़
चित्र 2: राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रतापगढ़ (चालकपुर बदफरोशान, रानीगंज) का प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भवन।

ज्ञान का खजाना: सेंट्रल लाइब्रेरी

किसी भी बेहतरीन कॉलेज की आत्मा उसका पुस्तकालय (लाइब्रेरी) होता है। यहाँ एक बहुत ही बड़ी 'सेंट्रल लाइब्रेरी' स्थापित की गई है। इस लाइब्रेरी में सिर्फ किताबें रखने की अलमारियां (Book section) ही नहीं हैं, बल्कि छात्रों के सुकून से बैठकर पढ़ने के लिए एक बहुत ही शांत और शानदार सिटिंग एरिया (Sitting Area) भी बनाया गया है । इस लाइब्रेरी में इंजीनियरिंग की महंगी से महंगी किताबें, जर्नल्स, रेफरेंस बुक्स और ऑनलाइन ई-रिसोर्सेज (इंटरनेट पर मौजूद किताबें) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं । इसका सीधा फायदा गरीब और मध्यम वर्ग के उन बच्चों को होता है जो बाज़ार से हज़ारों रुपये की किताबें नहीं खरीद सकते। वे यहाँ बैठकर दुनिया भर का ज्ञान मुफ़्त में हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा, पूरे परिसर में 24 घंटे और सातों दिन तेज़ इंटरनेट (Wi-Fi) की सुविधा बिना किसी रुकावट के मिलती है ।

बड़े-बड़े निर्माण जो अभी भी चल रहे हैं

यह कॉलेज बनकर रुका नहीं है, बल्कि यह भविष्य की ज़रूरतों को देखते हुए लगातार फैल और बढ़ रहा है। वर्तमान में यहाँ करोड़ों रुपये की लागत से बहुत बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। कैंपस के अंदर एक विशाल ऑडिटोरियम (सभागार) का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें एक साथ 1500 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी । जब यह बनकर तैयार हो जाएगा, तो यहाँ राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार, बड़ी कंपनियों के कार्यक्रम और सांस्कृतिक उत्सव आयोजित होंगे। दूर-दराज के ज़िलों और राज्यों से आने वाले बच्चों को रहने की कोई परेशानी न हो, इसके लिए लगभग 1350 छात्र-छात्राओं की कुल क्षमता वाले विशाल हॉस्टल्स का निर्माण तेज़ी से चल रहा है । इसके साथ ही, बाहर से आने वाले मेहमानों, अतिथि प्रोफेसरों (Guest Faculty) या प्लेसमेंट के लिए आने वाली कंपनियों के अधिकारियों के ठहरने के लिए कई मंज़िला 'विज़िटर हॉस्टल' (गेस्ट हाउस) भी बन रहा है ।

जो हॉस्टल पहले से बनकर तैयार हो चुके हैं, उनमें बच्चों को ठहराया जा रहा है, और वहाँ वॉर्डन (जैसे ईआर. पल्लवी सिंह, जो गर्ल्स हॉस्टल-2 की वॉर्डन हैं) बच्चों की सुरक्षा और सुख-सुविधा का पूरा ख्याल रखते हैं ।

शिक्षा का मंदिर: यहाँ कौन सी और कैसी विद्या दी जाती है?

इस कॉलेज का मुख्य उद्देश्य सिर्फ डिग्री बाँटना नहीं है, बल्कि ऐसे होनहार और व्यावहारिक इंजीनियर तैयार करना है जो कल के आधुनिक भारत का निर्माण कर सकें। यह कॉलेज तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय 'डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय' (AKTU), लखनऊ से पूरी तरह संबद्ध (Affiliated) है और इसका आधिकारिक कॉलेज कोड 1216 है ।

यहाँ मुख्य रूप से बी.टेक (B.Tech - बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी) की पढ़ाई कराई जाती है, जो कि चार साल का एक कड़ा और गहन कोर्स होता है। कॉलेज में इंजीनियरिंग की कुल 4 प्रमुख शाखाएं (Branches) हैं, और हर शाखा में 60 बच्चों के दाखिले (Intake) की मंज़ूरी सरकार द्वारा दी गई है । यह पढ़ाई नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के कड़े पैमानों के हिसाब से होती है, जिसमें किताबी ज्ञान से ज़्यादा करके सीखने (Practical learning) पर ज़ोर दिया जाता है ।

चारों प्रमुख शाखाओं (Branches) की गहरी जानकारी

  1. कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE - Computer Science & Engineering): आज की दुनिया पूरी तरह से कंप्यूटर, इंटरनेट और सॉफ़्टवेयर पर टिकी है। इस शाखा में बच्चों को डेटा स्ट्रक्चर, एल्गोरिदम, डेटाबेस मैनेजमेंट, साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) और सबसे आधुनिक तकनीक 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग' सिखाई जाती है। जो बच्चे भविष्य में बड़ी आईटी कंपनियों में बैठकर दुनिया के लिए नए ऐप और सॉफ़्टवेयर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह ब्रांच एक वरदान है।

  2. मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ME - Mechanical Engineering): मशीनें कैसे काम करती हैं, छोटी सी मोटर से लेकर हवाई जहाज़ और बड़े पावर प्लांट के पुर्जे कैसे बनते हैं, यह सब मैकेनिकल इंजीनियरिंग में गहराई से सिखाया जाता है। यहाँ रोबोटिक्स, इंजन की गरमाहट का विज्ञान (Thermodynamics), और फ्लूइड मैकेनिक्स की बारीक पढ़ाई होती है। जो बच्चे मशीनों के पुर्जों से प्यार करते हैं, वे इस विभाग में अपनी तकदीर संवारते हैं।

  3. सिविल इंजीनियरिंग (CE - Civil Engineering): देश का असली ढांचा सिविल इंजीनियर ही बनाते हैं। आधुनिक और स्मार्ट सड़कें, लंबे-चौड़े पुल, भूकंप रोधी इमारतें, और बड़े-बड़े बाँध कैसे बनते हैं, इसकी वैज्ञानिक और तकनीकी पढ़ाई इस शाखा में होती है। एक मज़दूर जब किसी बड़ी इमारत को बनते देखता है, तो वह सिविल इंजीनियर के दिमाग की ही उपज होती है।

  4. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE - Electrical Engineering): बिजली का उत्पादन कैसे होता है, बिजली को एक शहर से दूसरे शहर बिना नुकसान के कैसे पहुँचाया जाता है, सोलर पैनल (सौर ऊर्जा) कैसे काम करते हैं, और भविष्य की स्मार्ट इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ कैसे चलेंगी— इन सभी अत्याधुनिक विषयों की पढ़ाई इस विभाग में बेहद गंभीरता से कराई जाती है।

इन चारों मुख्य तकनीकी विभागों के अलावा, यहाँ एक और बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग है जिसे 'अप्लाइड साइंस एंड ह्यूमैनिटीज' (Applied Science & Humanities) कहा जाता है। यह विभाग इंजीनियरिंग के पहले साल के बच्चों की नींव मज़बूत करने का काम करता है। इसमें बच्चों को उच्च स्तर का गणित, भौतिक विज्ञान (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry), और मैनेजमेंट (प्रबंधन) जैसी ज़रूरी चीज़ें पढ़ाई जाती हैं, ताकि उनकी दिमागी क्षमता और सोचने का नज़रिया व्यापक हो सके।

किताबी ज्ञान से परे: अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं (Labs)

इंजीनियरिंग सिर्फ ब्लैकबोर्ड पर नहीं पढ़ी जा सकती; इसके लिए मशीनों से खेलना पड़ता है। इसलिए कॉलेज में ऐसी प्रयोगशालाएं (Labs) बनाई गई हैं, जो बड़े-बड़े उद्योगों को टक्कर देती हैं। कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग लैब', 'वेब टेक्नोलॉजी लैब', 'ऑपरेटिंग सिस्टम लैब' और 'प्रोग्रामिंग लैब' मौजूद हैं, जहाँ वे दुनिया की सबसे नई कोडिंग सीखते हैं । मैकेनिकल इंजीनियरिंग के बच्चों के लिए 'फ्लूइड मैकेनिक्स लैब', 'कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन (CAD) लैब', 'मटेरियल टेस्टिंग लैब', और 'मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस लैब' बनाई गई हैं, जहाँ वे लोहे और स्टील को अपनी मनचाही मशीनों में ढालना सीखते हैं । इसी तरह इलेक्ट्रिकल और सिविल विभागों की भी अपनी अत्यधिक आधुनिक प्रयोगशालाएं हैं जो दिन-रात काम करती हैं ।

कड़ा अनुशासन और परीक्षाओं का चक्र

इस कॉलेज में दाखिला लेना जितना मुश्किल है, यहाँ की पढ़ाई पूरी करना उससे भी ज़्यादा अनुशासन की मांग करता है। यह कोई ऐसा कॉलेज नहीं है जहाँ बच्चा जब चाहे आए और जब चाहे चला जाए। एकेटीयू (AKTU) के सख्त नियमों के अनुसार, हर छात्र के लिए क्लास में 75% उपस्थिति (Attendance) अनिवार्य है। अगर बच्चा क्लास में नहीं आएगा, तो उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलती ।

बच्चों की तैयारी को परखने के लिए कॉलेज प्रशासन लगातार परीक्षाएं आयोजित करता है। उदाहरण के तौर पर, कॉलेज के परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examination) और डीन एकेडमिक्स बड़ी बारीकी से परीक्षाओं का शेडयूल तैयार करते हैं। प्रथम क्लास टेस्ट (CT-1) जैसे कि 16 से 18 मार्च 2026 तक आयोजित किए गए, और दूसरे क्लास टेस्ट (CT-2) 28 से 30 अप्रैल 2026 या 27 से 29 नवंबर 2025 तक बेहद सख्ती के साथ आयोजित किए जाते हैं । इन परीक्षाओं के लिए कमरा नंबर (जैसे रूम नंबर 114, 115, 116, 209) और यहाँ तक कि छात्रों के रोल नंबर तक पहले से ही नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिए जाते हैं, जिससे परीक्षा में पूरी पारदर्शिता बनी रहे । यह कड़ा रूटीन बच्चों को दिमागी तौर पर इतना मज़बूत कर देता है कि वे दुनिया की किसी भी कंपनी का इंटरव्यू आसानी से निकाल लेते हैं।

ज्ञान के असली शिल्पी: हमारे गुरुजन और उनके संपर्क सूत्र

किसी भी स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय की असली पहचान उसकी चमचमाती इमारतें नहीं, बल्कि वहाँ पढ़ाने वाले शिक्षक (गुरु) होते हैं। प्रतापगढ़ के इस इंजीनियरिंग कॉलेज की सबसे बड़ी ताकत इसकी फैकल्टी (Faculty) है। यहाँ बच्चों को पढ़ाने वाले प्रोफेसर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे आईआईटी (IIT), एनआईटी (NIT) और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त करके आए हैं ।

इस कॉलेज की एक और बहुत खूबसूरत बात यह है कि यहाँ के अधिकारी और प्रोफेसर आम जनता, अभिभावकों और छात्रों से दूरी बनाकर नहीं रखते। वे हमेशा मदद के लिए तैयार रहते हैं। किसी भी अधिकारी या मंत्रालय को अगर कोई जानकारी लेनी हो, या किसी पिता को अपने बच्चे के भविष्य के बारे में पूछना हो, तो वे सीधे इन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

नेतृत्व की मिसाल: प्रो. (डॉ.) योगेंद्र नारायण सिंह (निदेशक / Director)

इस पूरे कॉलेज के मुखिया और निदेशक (Director) प्रो. योगेंद्र नारायण सिंह हैं। ये कोई साधारण प्रोफेसर नहीं हैं, बल्कि शिक्षा जगत का एक बहुत बड़ा नाम हैं। इन्होंने भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक 'हॉरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी' (HBTU) कानपुर से बी.टेक, 'आईआईटी (IIT) कानपुर' से एम.टेक (M.Tech) और 'आईआईटी बीएचयू (IIT-BHU) वाराणसी' से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी (Ph.D.) की है।

इनकी शोध और उपलब्धियां: प्रो. सिंह 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)', 'मशीन लर्निंग', 'पैटर्न रिकग्निशन' और 'बायोमेट्रिक्स' (Biometrics) के बहुत बड़े विशेषज्ञ हैं। इन्होंने 'बायोमेट्रिक ईसीजी (ECG)' सिस्टम पर एक ऐसी ज़बरदस्त रिसर्च की थी, जो इंसान के दिल की धड़कन (ECG) से उसकी पहचान कर सकती है। इस रिसर्च को दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित रिसर्च पब्लिशर 'एल्सेवियर' (Elsevier) ने साल 2015 में पूरे विश्व में 'सर्वश्रेष्ठ पेपर' (Best Paper) का अवार्ड दिया था। इसके अलावा, प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) ने इनके पढ़ाने के शानदार तरीके को देखते हुए साल 2022 में इन्हें 'बेस्ट टीचर अवार्ड' (Best Teacher Award) से भी नवाज़ा है। ये दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD-UP) जैसे सरकारी चैनलों पर भी अक्सर AI के विषय पर देश को जागरूक करते नज़र आते हैं।

आधिकारिक संपर्क सूत्र (Contact): कॉलेज के प्रशासनिक कार्यों, मार्गदर्शन अथवा प्रामाणिक जानकारी हेतु सीधे इनके कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है:

  • ई-मेल: director@recp.ac.in, recpratapgarh@gmail.com
  • लैंडलाइन नंबर: 05343-297424

कॉलेज के अन्य प्रमुख स्तंभ और प्रोफेसरों की सूची

नीचे दी गई तालिका में कॉलेज के उन सभी प्रमुख प्रोफेसरों और अधिकारियों का विवरण दिया गया है, जो इस कॉलेज को दिन-रात एक करके सींच रहे हैं। यह सूची इतनी विस्तृत है कि कोई भी व्यक्ति सीधे अपने मतलब के विभाग से संपर्क कर सकता है:

अधिकारी / प्रोफेसर का नाम पद और विभाग अतिरिक्त प्रशासनिक ज़िम्मेदारी संपर्क ई-मेल (E-mail) लैंडलाइन / फ़ोन
प्रो. (डॉ.) विपिन कुमार प्रोफेसर (गणित) व विभागाध्यक्ष, अप्लाइड साइंस डीन एकेडमिक्स (पढ़ाई-लिखाई के प्रमुख) vipin.kumar@recp.ac.in 05343-297424
ईआर. प्रशांत पाठक असिस्टेंट प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस T&P कोऑर्डिनेटर एवं स्कॉलरशिप प्रभारी (PhD, MMMUT से) prashant@recp.ac.in +91-76519-84765
डॉ. आलोक सान्याल असिस्टेंट प्रोफेसर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग T&P प्रभारी व लाइब्रेरी इंचार्ज (PhD, MNNIT इलाहाबाद) alok@recp.ac.in 05343-297424
ईआर. प्रमेश कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिप्टी कंट्रोलर ऑफ़ एग्जामिनेशन (परीक्षा उप-नियंत्रक) (संपर्क कॉलेज लैंडलाइन से) 05343-297424
सुश्री उत्कर्षा बैश असिस्टेंट प्रोफेसर, अप्लाइड साइंस (मैनेजमेंट) महिला सेल कोऑर्डिनेटर, छात्र शिकायत सेल इंचार्ज utkarsha@recp.ac.in 05343-297424
डॉ. संतोष कुमार एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट (T&P) सेल इंचार्ज santosh.kumar@recp.ac.in 05343-297424
डॉ. संतोष पांडे असिस्टेंट प्रोफेसर, अप्लाइड साइंस टाइम टेबल कोऑर्डिनेटर (PhD, IIT-BHU से) santosh@recp.ac.in 05343-297424
ईआर. पल्लवी सिंह असिस्टेंट प्रोफेसर, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग वार्डन गर्ल्स हॉस्टल-2, क्लासरूम इंचार्ज (संपर्क कॉलेज लैंडलाइन से) 05343-297424
डॉ. नीतीश जौहरी असिस्टेंट प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग T&P सेल के डिप्टी इंचार्ज nitish@recp.ac.in 05343-297424

इनके अलावा, कॉलेज में डॉ. मोहित गंगवार (प्रोफेसर, CSE), डॉ. एस. पी. सिंह (प्रोफेसर, CSE), डॉ. आशीष कुमार मिश्रा, डॉ. सोनी कुमारी (विभागाध्यक्ष, मैकेनिकल), डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. एच. एल. यादव (विभागाध्यक्ष, सिविल), डॉ. अरविन्द कुमार वर्मा, डॉ. पियूष गुप्ता, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. दिलीप कुमार पटेल, डॉ. राधा विश्वकर्मा, डॉ. मानिक, डॉ. सौरभ, ईआर. दिनेश कुमार, ईआर. शुभम मिश्रा, ईआर. शिवम् मिश्रा, ईआर. आनंद प्रताप सिंह, ईआर. असीत सिंह, ईआर. प्रत्यूष, ईआर. अन्नो, ईआर. एकता सिंह, ईआर. रितेश कुमार, और ईआर. प्रिंस जैसे बेहद योग्य और समर्पित शिक्षकों की एक बहुत लंबी और मज़बूत फौज है, जो अलग-अलग विभागों में बच्चों को तराशने का काम कर रही है।

इतने उच्च कोटि के शिक्षकों को कॉलेज में बनाए रखने के लिए, समय-समय पर AKTU के माध्यम से गेस्ट फैकल्टी (Guest Faculty) की नियुक्तियां भी होती रहती हैं, जिनके लिए बाकायदा वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किए जाते हैं और उन्हें AICTE के मानकों के अनुसार पूरा वेतन दिया जाता है। हालांकि, प्रशासनिक कारणों से कभी-कभी इन साक्षात्कारों की तारीखों में बदलाव भी होता है, जो प्रशासन की पूरी तरह से नियमबद्ध कार्यप्रणाली को दर्शाता है।

दाखिला, कट-ऑफ और फीस: कैसे पहुँचे इस ज्ञान के मंदिर तक?

एक आम आदमी के मन में यह सवाल उठना बहुत स्वाभाविक है कि "मेरे बच्चे को इस शानदार कॉलेज में दाखिला कैसे मिलेगा और इसमें खर्च कितना आएगा?"

यहाँ एडमिशन लेना आसान नहीं है, इसके लिए बच्चों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। प्रवेश के लिए छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक JEE Main (जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन) देनी होती है। इस परीक्षा में आए अंकों और रैंक के आधार पर UPTAC (उत्तर प्रदेश टेक्निकल एडमिशन काउंसलिंग) के ज़रिए यहाँ की सीटें बांटी जाती हैं । अगर कोई छात्र पहले से पॉलिटेक्निक या इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर चुका है, तो वह 'लेटरल एंट्री' (Lateral Entry) के ज़रिए सीधे बी.टेक के दूसरे साल में भी एडमिशन ले सकता है, जिसके नियम भी AKTU द्वारा तय किए गए हैं ।

कड़ी प्रतिस्पर्धा: कट-ऑफ रैंक के आंकड़े

इस कॉलेज की बढ़ती हुई लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ दाखिला पाने के लिए कट-ऑफ रैंक (Cut-off Rank) काफी कड़ा रहता है। नीचे दी गई तालिका में साल 2024 और 2025 के लिए 'ऑल इंडिया सामान्य वर्ग' (General - All India) और 'होम स्टेट' (उत्तर प्रदेश के निवासी) के छात्रों की अंतिम (क्लोजिंग) रैंक दी गई है, जिससे पता चलता है कि कितनी रैंक तक के बच्चों को यहाँ एडमिशन मिल सका:

इंजीनियरिंग शाखा (Branch) वर्ष 2025 क्लोजिंग रैंक (All India) वर्ष 2025 क्लोजिंग रैंक (Home State) वर्ष 2024 क्लोजिंग रैंक (All India)
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) 9,24,471 3,39,590 2,87,048
सिविल इंजीनियरिंग (CE) 21,21,658 13,59,442 14,01,278
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE) 21,03,793 13,27,204 9,05,039
मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ME) 21,04,653 14,38,284 12,85,372

(नोट: यह रैंक डेटा UPTAC काउंसलिंग के अलग-अलग राउंड और छात्रों की बदलती मांग के अनुसार ऊपर-नीचे होता रहता है।)

फीस और सरकारी मदद (Scholarships)

चूँकि यह एक पूर्ण रूप से सरकारी (राजकीय) कॉलेज है, इसलिए प्राइवेट कॉलेजों की भारी-भरकम फीस की तुलना में यहाँ का शुल्क बेहद किफायती और न्यायसंगत है:

  • ट्यूशन फीस (पढ़ाई का खर्च): बी.टेक के लिए पूरे एक साल की फीस लगभग 69,000 रुपये निर्धारित है (जो लगभग 40,000 से 50,000 रुपये प्रति सेमेस्टर के दायरे में बैठती है)।
  • हॉस्टल फीस (रहने-खाने का खर्च): हॉस्टल में रहने का खर्च भी लगभग 30,000 रुपये प्रति सेमेस्टर के आसपास आता है।
💡 गरीब छात्रों के लिए संजीवनी (स्कॉलरशिप एवं शुल्क प्रतिपूर्ति): पैसे की तंगी किसी भी होनहार बच्चे की पढ़ाई में रुकावट न बने, यह सरकार और कॉलेज प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए कॉलेज में एक विशेष 'स्कॉलरशिप सेल' क्रियाशील है, जिसके प्रभारी ईआर. प्रशांत पाठक हैं। इस सेल के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार की 'यूपी स्कॉलरशिप' (UP Scholarship) योजना और केंद्र सरकार के 'नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल' (NSP) के तहत शत-प्रतिशत फॉर्म भरवाए जाते हैं। अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अल्पसंख्यक वर्ग, और आर्थिक रूप से कमज़ोर (EWS) परिवारों के पात्र छात्रों की पूरी फीस सीधे उनके बैंक खाते में वापस (Reimburse) आ जाती है, जिससे अभिभावकों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

भविष्य की सुरक्षित उड़ान: प्लेसमेंट (Placement) और नौकरियां

हर मज़दूर, किसान या मध्यम वर्गीय नौकरीपेशा इंसान अपना पेट काटकर अपने बच्चे को इंजीनियरिंग की पढ़ाई सिर्फ इसलिए करवाता है ताकि पढ़-लिखकर उसे एक अच्छी, सुरक्षित और इज़्ज़तदार नौकरी मिल सके। इस कॉलेज ने अपनी स्थापना के इतने कम समय में जो प्लेसमेंट (नौकरी मिलने की दर) के आंकड़े दिए हैं, वे न सिर्फ हैरान करने वाले हैं बल्कि अत्यंत उत्साहवर्धक हैं।

कॉलेज का अपना एक बेहद सक्रिय 'ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल' (T&P Cell) है। इस सेल का मुख्य काम बच्चों और कॉर्पोरेट जगत की बड़ी कंपनियों के बीच एक सशक्त पुल (Bridge) बनाना है। इसके प्रभारी डॉ. संतोष कुमार (सीएसई) हैं और उनके साथ डिप्टी इंचार्ज के रूप में डॉ. आलोक सान्याल (मैकेनिकल) और डॉ. नीतीश जौहरी (सिविल) भी दिन-रात काम करते हैं।

📊 प्रमाणित प्लेसमेंट आंकड़े एवं कॉर्पोरेट रिकॉर्ड्स:
  • कुल प्लेसमेंट दर (Overall Placement Rate): कॉलेज का कुल प्लेसमेंट रेट 67% रहा है, जो किसी भी नवनिर्मित राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।
  • उच्चतम पैकेज (Highest Salary Package): यहाँ के छात्र को मिला सबसे अधिक सैलरी पैकेज 13 लाख रुपये सालाना (13 LPA) का रहा है। यह आंकड़ा सिद्ध करता है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती।
  • औसत पैकेज (Average Package): कैंपस का औसत पैकेज लगभग 4.0 लाख रुपये सालाना (4.0 LPA) दर्ज किया गया है।
  • प्रमुख भर्ती कंपनियाँ (Top Recruiters): देश और दुनिया की जानी-मानी दिग्गज आईटी कंपनियाँ जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys), एचसीएल (HCL), और विप्रो (Wipro) कैंपस ड्राइव के जरिए छात्रों का चयन कर रही हैं।

यह 'ट्रेनिंग सेल' सिर्फ कंपनियों को बुलाता ही नहीं है, बल्कि बच्चों को इंडस्ट्री की ज़रूरतों के अनुरूप तैयार भी करता है। छात्रों को एप्टीट्यूड (Aptitude - तर्कशक्ति), कम्युनिकेशन स्किल्स (अंग्रेजी संवाद क्षमता), ग्रुप डिस्कशन (समूह चर्चा) और तकनीकी साक्षात्कारों का सघन प्रशिक्षण दिया जाता है। कॉलेज के पास डिजिटल प्लेसमेंट पोर्टल और सुसज्जित इंटरव्यू केबिन हैं, जहाँ से छात्र ऑनलाइन व ऑफलाइन इंटरव्यू में भाग लेते हैं। इसके अलावा, छात्रों को प्रतिष्ठित उद्योगों में इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के लिए भी भेजा जाता है।

कैंपस की हलचल: पढ़ाई के साथ-साथ ज़िन्दगी और समाज के रंग

यहाँ के बच्चे सिर्फ प्रयोगशालाओं में बंद रहकर मशीनों से ही नहीं खेलते। एक बेहतरीन इंसान, एक ज़िम्मेदार नागरिक और एक होशियार लीडर बनने के लिए समाज और दुनिया को समझना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए कॉलेज में साल भर कुछ न कुछ ऐसे बड़े आयोजन होते रहते हैं जो छात्रों के अंदर एक नई ऊर्जा और जोश भर देते हैं ।

1. रिदम (RHYTHM) - कॉलेज का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और तकनीकी त्योहार

जैसे गाँव में साल में एक बार बड़ा मेला लगता है, जिसका सबको इंतज़ार रहता है, वैसे ही इंजीनियरिंग कॉलेजों में 'फेस्ट' (Fest) होते हैं। प्रतापगढ़ के इस कॉलेज के सबसे बड़े सालाना सांस्कृतिक और तकनीकी (Cultural and Technical) महाकुंभ का नाम 'रदम' (RHYTHM) है। उदाहरण के लिए, 'रदम 2026' का आयोजन पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ 25 से 27 मार्च 2026 को किया जा रहा है । इस तीन दिन के त्योहार में छात्र अपनी उन प्रतिभाओं का प्रदर्शन करते हैं जो किताबों में नहीं छपी होतीं— चाहे वह कोई नया और अनोखा रोबोट बनाना हो, मंच पर गीत गाना हो, या फिर समाज को जगाने वाला कोई नाटक करना हो।

2. स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (Smart India Hackathon)

तकनीकी दुनिया के छात्रों की दिमागी कसरत के लिए देश की सबसे बड़ी प्रतियोगिता 'स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन' होती है, जिसमें बच्चे देश की बड़ी-बड़ी असली समस्याओं का सॉफ़्टवेयर या हार्डवेयर के ज़रिए समाधान निकालते हैं। कॉलेज ने 18 और 19 सितंबर 2025 को अपने कैंपस में इस प्रतियोगिता का एक बड़ा आंतरिक (Internal) आयोजन किया था, ताकि यहाँ के बच्चे तैयार होकर राष्ट्रीय स्तर पर कॉलेज का नाम रोशन कर सकें ।

3. सामाजिक सरोकार: जब कॉलेज की दीवारें गाँव की पगडंडियों से मिलती हैं

इस कॉलेज का मकसद सिर्फ पैसा कमाने वाले रोबोट या मशीन तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे इंसान तैयार करना है जिनके सीने में समाज के दर्द को महसूस करने वाला दिल हो। इसके लिए कॉलेज में एक बहुत ही सक्रिय 'सोशल क्लब' (Social Club) बनाया गया है।

इस क्लब की सबसे खास बात यह है कि यह कॉलेज की चारदीवारी से निकलकर आस-पास के गाँवों में जाकर ज़मीनी स्तर पर काम करता है। 5 अप्रैल 2026 को इस क्लब ने एक बेहद भावुक और प्रेरक पहल करते हुए प्रतापगढ़ के 'गवन पाटी' (Gavan Pati) गाँव का दौरा किया । कॉलेज के छात्रों और प्रोफेसरों ने वहाँ के गरीब और ग्रामीण बच्चों से मुलाकात की, उन्हें पढ़ाई के महत्व के बारे में समझाया, उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित किया। और सबसे दिल छू लेने वाली बात यह थी कि उन ग्रामीण बच्चों को खास तौर पर आमंत्रित किया गया कि वे कॉलेज में आएं और उन बड़ी-बड़ी अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं (Labs) और खेल के मैदानों को अपनी आँखों से देखें । यह एक ऐसा कदम है जो गाँव के एक गरीब बच्चे के अंदर भी बड़े सपने देखने का बीज बोता है और उसे यह विश्वास दिलाता है कि वह भी एक दिन बड़ा इंजीनियर बन सकता है।

इसके अलावा, यह कॉलेज पर्यावरण को बचाने, स्वास्थ्य और साफ-सफाई के प्रति लोगों को जागरूक करने और समाज में महिलाओं के सम्मान (जैसे 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' से जुड़े बड़े कार्यक्रम) को लेकर भी हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहता है । 14 अप्रैल को यहाँ 'डॉ. बी.आर. अम्बेडकर जयंती' भी बड़े हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मनाई जाती है, ताकि छात्र भारत के संविधान, समानता और न्याय का पाठ हमेशा याद रखें ।

4. अनुशासन और सुरक्षा: एक भयमुक्त माहौल

जब कोई माता-पिता अपने बच्चे को घर से दूर भेजते हैं, तो उन्हें सबसे बड़ा डर यह होता है कि कहीं कॉलेज में उनके बच्चे के साथ सीनियर्स रैगिंग (बदमाशी) न करें। लेकिन यहाँ इस मामले में प्रशासन का रवैया 'ज़ीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने वाला) है। कॉलेज में एक सख्त 'एंटी-रैगिंग कमेटी' (Anti-ragging Committee), पूरी मुस्तैदी से काम करने वाली 'प्रॉक्टर टीम' (Proctor Team), और 'छात्र शिकायत निवारण सेल' (Student Grievance Redressal Cell) बहुत मजबूती से काम करते हैं, जिनकी इंचार्ज सुश्री उत्कर्षा बैश हैं ।

साथ ही, कॉलेज में 'मेंटर-मेंटी पॉलिसी' (Mentor-Mentee Policy) बहुत शानदार तरीके से लागू की गई है। इसके तहत कॉलेज में आने वाले हर कुछ बच्चों के समूह पर एक प्रोफेसर को उनका 'गार्जियन' (अभिभावक) बना दिया जाता है । यह प्रोफेसर उन बच्चों की हर परेशानी— चाहे वह पढ़ाई में मन न लगने की हो, हॉस्टल की कोई समस्या हो, या निजी ज़िन्दगी की कोई उलझन हो— उसे एक दोस्त और पिता की तरह सुनता है और उसे सुलझाता है। इससे बच्चे को कभी यह महसूस ही नहीं होता कि वह अपने घर से दूर है।

निष्कर्ष: माटी से मशीन तक की सफल उड़ान और एक नई उम्मीद की किरण

भारत रत्न बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रतापगढ़ सिर्फ ईंट, पत्थर, लोहे और सीमेंट से बनी एक निर्जीव इमारत नहीं है। यह उत्तर प्रदेश के उस विशाल किसान और मज़दूर वर्ग के लिए एक जीता-जागता सपना है, जिसने हमेशा बड़े शहरों के महंगे इंजीनियरिंग कॉलेजों को सिर्फ बाहर की चारदीवारी से हसरत भरी नज़रों से देखा था।

यह कॉलेज इस बात की गवाही देता है कि सरकार की एक अच्छी नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति से कैसे एक शांत, छोटे से गाँव (चालकपुर बदफरोशान) के खेतों के बीच देश के भविष्य के निर्माण का एक विशाल केंद्र खड़ा किया जा सकता है। यहाँ की मिट्टी में अब सिर्फ फसलों की महक नहीं है, बल्कि अब यहाँ मशीनों की गूंज है, रोबोटिक्स की बारीक समझ है, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की विश्व-स्तरीय सोच पनप रही है।

प्रो. (डॉ.) योगेंद्र नारायण सिंह जैसे महान शोधकर्ता और अनुभवी प्रोफेसरों के कुशल मार्गदर्शन में , और ईआर. प्रशांत पाठक, डॉ. आलोक सान्याल, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. विपिन कुमार जैसी युवा, ऊर्जावान और देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों (IIT, NIT, MMMUT) से पढ़ी हुई शिक्षकों की फौज की दिन-रात की मेहनत से , यह नया कॉलेज हर दिन एक नया इतिहास रच रहा है।

यह संस्थान इस बात का सबसे बड़ा और सच्चा प्रमाण है कि अगर ज्ञान का प्रकाश, आधुनिक संसाधन और सही मार्गदर्शन समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के दरवाज़े तक पहुँचाया जाए, तो वह न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे समाज और देश का भविष्य रोशन कर सकता है।

प्रतापगढ़ की माटी और यहाँ के आँवले में जो प्राकृतिक मिठास है, वह मिठास और मेहनत अब यहाँ से निकलने वाले युवा इंजीनियरों की सफलता की कहानियों में भी घुलने लगी है। यह महज़ एक कॉलेज के बनने की कहानी नहीं है, यह एक गरीब की उम्मीदों की, माटी से मशीन तक के सफर की, और गाँव की पगडंडियों से निकलकर आसमान की बुलंदियों तक पहुँचने की एक बेहद शानदार, सच्ची और प्रेरणादायक कहानी है।

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