राजा अभय प्रताप सिंह 'बड़े राजा' का जीवन परिचय: प्रतापगढ़ रियासत, 10वीं लोकसभा सांसद व शैक्षिक योगदान
प्रतापगढ़ रियासत के गौरवशाली वारिस, 10वीं लोकसभा (1991–1996) में प्रतापगढ़ से सांसद और पी.बी. डिग्री कॉलेज के अध्यक्ष रहे राजा अभय प्रताप सिंह, जिन्हें जनमानस में 'बड़े राजा' के नाम से अगाध आदर प्राप्त था, का संपूर्ण राजनीतिक, ऐतिहासिक एवं सामाजिक जीवन-वृत्त।
(7 दिसंबर 1936 – 7 अगस्त 2013)
पूर्व सांसद (10वीं लोकसभा) व प्रतापगढ़ एस्टेट प्रमुख
👑 संक्षिप्त जीवन एवं व्यक्तिगत परिचय
- पूरा नाम: राजा अभय प्रताप सिंह (Raja Abhay Pratap Singh)
- लोकप्रिय संबोधन: 'बड़े राजा' (Bade Raja)
- जन्म तिथि: 7 दिसंबर 1936
- पुण्यतिथि (निधन): 7 अगस्त 2013 (आयु 76 वर्ष)
- जन्म स्थान / गद्दी: प्रतापगढ़ किला (किला कोट, प्रतापगढ़ सिटी, उ.प्र.)
- राजवंश / परंपरा: सोमवंशी क्षत्रिय राजपरिवार (प्रतापगढ़ रियासत)
- माता-पिता: राजा अजीत प्रताप सिंह (पूर्व सांसद व मंत्री) एवं रानी लक्ष्मी देवी
- विवाह: राजकुमारी आशा कुमारी जी (विवाह: 1 मार्च 1955)
- सुपुत्र: कुंवर अनिल प्रताप सिंह ('अनिल राजा' - वरिष्ठ राजनेता)
- संसदीय प्रतिनिधित्व: 10वीं लोकसभा सदस्य (1991–1996), प्रतापगढ़ सीट
- राजनीतिक दल: जनता दल (Janata Dal)
- शैक्षणिक संस्था: अध्यक्ष / मुख्य संरक्षक, प्रताप बहादुर पीजी कॉलेज (PBPG College)
🌟 व्यक्तित्व एक नजर में: बेला-प्रतापगढ़ का ऐतिहासिक राजवैभव व जनसरोकार
उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरती प्रतापगढ़ की राजनीति और सांस्कृतिक पहचान में यहाँ के राजघरानों की केंद्रीय भूमिका रही है। इसी गौरवमयी कड़ी में प्रतापगढ़ एस्टेट (किला कोट, प्रतापगढ़ सिटी) के अधिपति राजा अभय प्रताप सिंह का नाम अत्यंत आदर और गरिमा के साथ लिया जाता है।
अपने पिता—स्वतंत्रता सेनानी, दो बार सांसद व उत्तर प्रदेश सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री रहे राजा अजीत प्रताप सिंह—की राजनीतिक एवं सामाजिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अभय प्रताप सिंह ने 1991 के ऐतिहासिक आम चुनाव में 10वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में प्रतापगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। उच्च शिक्षा के प्रसार हेतु प्रताप बहादुर पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज (पी.बी.पी.जी. कॉलेज) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जिले के हजारों युवाओं के भविष्य निर्माण में अविस्मरणीय भूमिका निभाई।
📋 राजा अभय प्रताप सिंह: विस्तृत तथ्य एवं जीवन सारणी
राजा अभय प्रताप सिंह के कुल, व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक संबंधों और राजनीतिक दायित्वों का कालक्रमबद्ध विवरण नीचे प्रस्तुत है:
| विषय / क्षेत्र | प्रामाणिक विवरण |
|---|---|
| नाम व पहचान | राजा अभय प्रताप सिंह (उर्फ 'बड़े राजा') |
| जन्म तिथि व स्थान | 7 दिसंबर 1936, प्रतापगढ़ किला, प्रतापगढ़ सिटी, उत्तर प्रदेश |
| देहावसान (स्वर्गवास) | 7 अगस्त 2013 (76 वर्ष की आयु में) |
| पिता | राजा अजीत प्रताप सिंह (पूर्व सांसद प्रतापगढ़ 1962 व 1967, पूर्व वन, परिवहन व सहकारिता मंत्री, उ.प्र. सरकार) |
| माता | रानी लक्ष्मी देवी (राजा अजीत प्रताप सिंह की प्रथम महारानी) |
| धर्मपत्नी | राजकुमारी आशा कुमारी जी (विवाह संपन्न: 1 मार्च 1955) |
| पुत्र | कुंवर अनिल प्रताप सिंह उर्फ 'अनिल राजा' (वरिष्ठ कांग्रेस नेता, 1993 व 2007 विश्वनाथगंज वि.स. प्रत्याशी) |
| गद्दी / रियासत | प्रतापगढ़ एस्टेट (Bela-Pratapgarh Estate / Qila Kot, Somvanshi Dynasty) |
| संसदीय काल | 10वीं लोकसभा सदस्य (1991–1996), प्रतापगढ़ संसदीय निर्वाचन क्षेत्र |
| संबद्ध दल | जनता दल (Janata Dal) |
| संस्थागत संरक्षण | अध्यक्ष / मुख्य संरक्षक, प्रताप बहादुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय (P.B.P.G. College), प्रतापगढ़ सिटी |
| व्यक्तित्व विशेषता | राजसी गरिमा, शैक्षिक संवर्धन, निष्पक्ष सामाजिक न्याय और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता |
🏰 प्रतापगढ़ रियासत (किला कोट) और शाही कुल परंपरा
प्रतापगढ़ का ऐतिहासिक नाम और नगर की आधारशिला 17वीं सदी में सोमवंशी क्षत्रिय नरेश राजा प्रताप सिंह (1617–1682 ई.) द्वारा सई नदी के सुरम्य तट पर एक मजबूत दुर्ग (प्रतापगढ़ किला) के निर्माण के साथ रखी गई थी। उन्हीं के नाम पर इस पूरे क्षेत्र का नाम 'प्रतापगढ़' पड़ा।
प्रतापगढ़ एस्टेट के शासकों में राजा प्रताप बहादुर सिंह का नाम शिक्षा, समाज सुधार और जनहित के कार्यों के लिए अमर रहा। इसी गौरवशाली राजवंश में राजा अजीत प्रताप सिंह का जन्म हुआ, जो स्वतंत्र भारत के शुरुआती दशकों में प्रतापगढ़ के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में गिने गए। राजा अजीत प्रताप सिंह ने 1962 और 1967 के लोकसभा चुनावों में प्रतापगढ़ से सांसद बनकर जिले का प्रतिनिधित्व किया और बाद में उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों में वन, परिवहन और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे।
राजा अजीत प्रताप सिंह और उनकी प्रथम पत्नी रानी लक्ष्मी देवी के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में 7 दिसंबर 1936 को राजा अभय प्रताप सिंह का जन्म हुआ। परंपरा और संस्कार के धनी अभय प्रताप सिंह को बचपन से ही राजसी उत्तरदायित्वों और प्रजापालक संस्कृति का सानिध्य मिला। 1 मार्च 1955 को उनका पाणिग्रहण संस्कार राजकुमारी आशा कुमारी जी के साथ संपन्न हुआ।
🗳️ 1991 का ऐतिहासिक आम चुनाव: 10वीं लोकसभा में विजय की गाथा
वर्ष 1991 का आम चुनाव भारतीय राजनीति का अत्यंत संवेदनशील और ऐतिहासिक मोड़ था। देश में राम मंदिर आंदोलन, मंडल आयोग की सिफारिशों के बाद का सामाजिक उभार और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की शहादत के त्रिकोणीय माहौल के बीच चुनाव संपन्न हुए।
प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर उस समय का चुनाव बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो गया था। कांग्रेस की तरफ से पूर्व केंद्रीय मंत्री राजा दिनेश सिंह, भारतीय जनता पार्टी से उदय राज मिश्र और जनता दल के टिकट पर राजा अभय प्रताप सिंह चुनावी समर में आमने-सामने थे।
इस चुनाव में राजा अभय प्रताप सिंह ने 1,10,838 मत (30.68%) हासिल कर विजय पताका फहराई। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी उदय राज मिश्र (1,07,142 मत) को पराजित किया, जबकि कांग्रेस के दिग्गज नेता राजा दिनेश सिंह 94,845 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस प्रकार राजा अभय प्रताप सिंह 10वीं लोकसभा में प्रतापगढ़ के सांसद निर्वाचित होकर दिल्ली पहुंचे।
📊 1991 प्रतापगढ़ लोकसभा चुनाव परिणाम (10वीं लोकसभा)
| प्रत्याशी का नाम | राजनीतिक दल | प्राप्त मत | मत प्रतिशत | परिणाम |
|---|---|---|---|---|
| राजा अभय प्रताप सिंह | जनता दल (Janata Dal) | 1,10,838 | 30.68% | विजयी (विजेता) |
| उदय राज मिश्र | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 1,07,142 | 29.66% | निकटतम प्रतिद्वंद्वी |
| राजा दिनेश सिंह | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | 94,845 | 26.25% | तृतीय स्थान |
| अन्य प्रत्याशी व निर्दलीय | विविध | 48,460 | 13.41% | - |
🎓 उच्च शिक्षा में ऐतिहासिक योगदान: पी.बी. डिग्री कॉलेज का संरक्षण
राजनीति के साथ-साथ राजा अभय प्रताप सिंह का सबसे स्थायी और अमूल्य योगदान शिक्षा जगत में रहा। प्रतापगढ़ जनपद में उच्च शिक्षा की रोशनी फैलाने वाले सबसे प्रतिष्ठित संस्थान प्रताप बहादुर पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज (PBPG College, Pratapgarh City) के वे लंबे समय तक अध्यक्ष व प्रमुख संरक्षक रहे।
उल्लेखनीय है कि इस महाविद्यालय की नींव प्रतापगढ़ राजपरिवार के महान पूर्वज राजा प्रताप बहादुर सिंह की स्मृति में रखी गई थी। राजा अभय प्रताप सिंह ने अध्यक्ष रहते हुए महाविद्यालय में:
- कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों के विस्तार को गति प्रदान की।
- ग्रामीण व किसान परिवारों के छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाया।
- कॉलेज परिसर के अनुशासन, पुस्तकालय संवर्धन और शैक्षणिक वातावरण को नई ऊंचाइयां दीं।
जिले के अनगिनत प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, प्राध्यापक, अधिवक्ता और राजनेता इसी संस्थान से शिक्षा ग्रहण कर देश-विदेश में प्रतापगढ़ का नाम रोशन कर रहे हैं, जिसका श्रेय राजपरिवार के इस शैक्षणिक संकल्प को जाता है।
🏛️ राजपरिवार की राजनीतिक परंपरा और कुंवर अनिल प्रताप सिंह ('अनिल राजा')
राजा अभय प्रताप सिंह के सुपुत्र कुंवर अनिल प्रताप सिंह, जिन्हें जनसामान्य में आदरपूर्वक 'अनिल राजा' कहा जाता है, ने अपने पिता और दादा की राजनीतिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया।
अनिल प्रताप सिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कर्मठ नेता के रूप में सक्रिय रहे। उन्होंने प्रतापगढ़ जनपद के विश्वनाथगंज विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से दो बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा:
- वर्ष 1993 विधानसभा चुनाव: कांग्रेस के टिकट पर विश्वनाथगंज से सशक्त ताल ठोकी।
- वर्ष 2007 विधानसभा चुनाव: पुनः भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जनता के बीच जनसेवा के संकल्प के साथ उतरे।
यद्यपि चुनावी अंकगणित में विजय प्राप्त नहीं हो सकी, परंतु 'अनिल राजा' और प्रतापगढ़ राजपरिवार ने क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में हमेशा अपनी सक्रिय सहभागिता बनाए रखी।
📍 ऐतिहासिक प्रतापगढ़ किला (किला कोट) व भौगोलिक अवस्थिति
प्रतापगढ़ शहर से सटा 'प्रतापगढ़ सिटी' इलाका सई नदी के किनारे बसा है, जहाँ राजा प्रताप सिंह द्वारा 17वीं सदी में निर्मित ऐतिहासिक दुर्ग (किला कोट) आज भी राजपरिवार के ऐतिहासिक वैभव और सांस्कृतिक धरोहर की गवाही देता है।