अजगरा का मशहूर मेला, प्रतापगढ़ (Famous Ajgara Mela Pratapgarh)

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📸 21 पावन तस्वीरों और चौपाल की जुबानी सजीव गाथा | Pratapgarh HUB

अजगरा का मशहूर मेला: 11 पुरवों की चौपाल, 21 तस्वीरों का सफर और बाबा की जुबानी मेले का आँखों देखा हाल

अगहन के तीसरे मंगलवार की वो मनमोहक सुबह, सई-बकुलाही कछार की खुशबू, चाट-जलेबी की मिठास, तक्षक धाम और यक्ष-युधिष्ठिर सरोवर की सजीव सचित्र कहानी।

👴 बाबा की चौपाल से:

"अरे बचवा! कौड़ा (अलाव) के चारों तरफ अपनी-अपनी ढिबरी और खाट खींच लो, आज पूस की कड़ाके की ठंड है। तुम सब कब से हठ पकड़े बैठे थे न कि दादाजी, हमको अजगरा के उस मशहूर मेले की सचित्र कहानी सुनाइए? तो लो, आज हम तुम्हें बातों-बातों में केवल कहानी ही नहीं सुनाएंगे, बल्कि अपनी आँखों से अजगरा के एक-एक कोने, उस पावन सरोवर, तक्षक धाम और मेले के उन 21 पावन दृश्यों का साक्षात दीदार भी कराएंगे!"

"जब हमारे प्रतापगढ़ में अगहन का महीना आता है, धान की महक खलिहानों में भर जाती है, तब दूर-दूर के जनपदों तक एक ही नाम की गूँज होती है—अजगरा का मेला! जरा अपनी आँखों के सामने इस शांत सरोवर की पहली झलक देखो बचवा, यहीं से शुरू होती है हमारी इस पावन धरती की अमर दास्तान!"

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👦 उत्सुक बच्चा:

"दादाजी! यह सरोवर कितना विशाल और शांत दिख रहा है। लेकिन यह गाँव कैसा है? लोग कहते हैं कि अजगरा कोई एक छोटा गाँव नहीं है, इसमें कई पुरवे और नदियाँ हैं?"

🏡 11 पुरवों का विशाल कुनबा और चारों ओर बहती नदियाँ

👴 बाबा का जवाब:

"शाबाश लल्ला! बिल्कुल पते की बात छेड़ी। अजगरा कोई एक डगर का गाँव नहीं है। यह कुल 11 सुंदर पुरवों (मजरों) को मिलाकर बना एक बहुत बड़ा और आबाद इलाका है। गाँव के इन 11 पुरवों में जो भाईचारा और प्रेम है, वो पूरे अवध में मिसाल है। एक पुरवे में ब्याह-शादी हो, तो ग्यारहों पुरवे के लोग अपने घर का काज समझकर जुट जाते हैं!"

"और भगवान ने इसकी बनावट ऐसी रची है कि चारों ओर पानी की अविरल धारा बहती है। एक तरफ हमारी सई नदी, दूसरी तरफ पवित्र बकुलाही नदी, और पास से ही कलकल बहती सकरनी और लोनी नदियां गुजरती हैं। इन नदियों की गोद में बसा होने के कारण यहाँ की माटी हमेशा हरी-भरी और उपजाऊ रहती है।"

क्रम पुरवे का नाम (Majra) क्रम पुरवे का नाम (Majra)
1 बड़ा अजगरा (Bada Ajgara) 7 अमिलहा (Amilha)
2 छोटा अजगरा (Chhota Ajgara) 8 पूरे तुलसी (Pure Tulsi)
3 रानीगंज अजगरा (Raniganj Ajgara) 9 पूरे नेवाजी (Pure Newaji)
4 जोगापुर (Jogapur) 10 कटहरिया (Katahariya)
5 धानीपुर (Dhanipur) 11 पूरे गिरवर (Pure Girwar)
6 डिहवा (Dihwa) - (आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक)
यक्ष युधिष्ठिर संवाद स्थल अजगरा मंदिर परिसर Yaksh Yudhishthir Samvad Sthal Temple अजगरा धाम का पावन परिवेश और वृक्ष Ajgara Dhaam Greenery and Trees सरोवर के घाट और सीढ़ियाँ Sarovar Ghat Stairs Ajgara
👧 छोटी बिटिया:

"बाबा! इस गाँव का नाम 'अजगरा' क्यों पड़ा? क्या सच में यहाँ कभी कोई विशाल अजगर आया था?"

🐍 संक्षेप में पौराणिक कथा: नहुष का अहंकार और अजगर रूप

👴 बाबा की जुबानी:

"हाँ बिटिया, इसके पीछे बड़ी रोचक कथा है! सतयुग में राजा नहुष बड़े प्रतापी राजा थे। उनके पुण्य इतने बढ़े कि जब देवराज इंद्र पद छोड़कर भागे, तो देवताओं ने नहुष को ही स्वर्ग का राजा बना दिया। लेकिन पद मिलते ही नहुष को घमंड हो गया! वे सप्तऋषियों से अपनी पालकी उठवाने लगे। जल्दी चलने की धुन में उन्होंने महर्षि अगस्त्य को पैर से धक्का मार दिया और चिल्लाए—'सर्प-सर्प' (तेज चलो)!"

"ऋषि ने तुरंत श्राप दे दिया—'रे अहंकारी! तू ऋषियों को लात मारता है, जा स्वर्ग से गिरकर धरती पर एक विशाल अजगर बन जा!' और नहुष धड़ाम से सीधे इसी धरती पर अजगर बनकर गिरे। इसी कारण यह स्थल युगों-युगों से 'अजगरा' कहलाया!"

अजगरा सरोवर का तटवर्ती दृश्य Ajgara Sarovar Bank Raniganj प्राचीन वृक्ष और सरोवर की शीतल छाया Ancient Trees at Ajgara Sarovar अजगरा पावन तीर्थ क्षेत्र Ajgara Holy Pilgrimage Spot Pratapgarh
👦 उत्सुक बच्चा:

"दादाजी! और महाभारत के पांडव यहाँ कब आए थे? यक्ष ने युधिष्ठिर से क्या पूछा था?"

🧠 सरोवर तट पर यक्ष-युधिष्ठिर संवाद: धर्म की सबसे बड़ी परीक्षा

👴 बाबा श्रद्धा से बताते हैं:

"हाँ लल्ला! महाभारत काल में जब पाँचों पांडव वनवास काट रहे थे, तो वे इसी अजगरा के घने वनों में पहुँचे। भीषण प्यास से व्याकुल नकुल, सहदेव, अर्जुन और भीम ने जब बिना यक्ष की आज्ञा के इस सरोवर का जल पीना चाहा, तो वे सब मूर्छित होकर गिर पड़े।"

"अंत में धर्मराज युधिष्ठिर आए। उन्होंने देखा कि उनके वीर भाई निष्प्राण पड़े हैं। तभी बगुले के रूप में धर्मराज यक्ष प्रकट हुए। युधिष्ठिर ने धैर्य से यक्ष के सभी गूढ़ प्रश्नों के अद्भुत उत्तर दिए। यक्ष ने पूछा—'धरती से भारी कौन है?' युधिष्ठिर बोले—'माँ!' यक्ष ने पूछा—'आसमान से ऊँचा कौन है?' युधिष्ठिर बोले—'पिता!' युधिष्ठिर का ज्ञान और निष्पक्ष न्याय देखकर यक्ष प्रसन्न हुए और सभी भाइयों को पुनर्जीवित कर दिया!"

यक्ष युधिष्ठिर संवाद स्थल घाट की सीढ़ियाँ Ghat Stairs Yaksh Yudhishthir Spot सरोवर का विशाल विहंगम दृश्य Panoramic View of Ajgara Lake अजगरा सरोवर का पावन तट Holy Bank of Ajgara Lake Raniganj
👦 उत्सुक बच्चा:

"दादाजी! अब मेले की बात बताइए ना! अगहन के तीसरे मंगलवार को कैसा माहौल होता है और दूर-दूर से लोग कैसे आते हैं?"

🎪 अगहन का तीसरा मंगलवार: दूर-दूर से उमड़ता विशाल जनसैलाब

👴 बाबा की आँखों में चमक:

"अरे लल्ला! अगहन के तीसरे मंगलवार की भोर का नजारा अगर देख लो तो आँखें तृप्त हो जाएं। सुबह चार बजे से ही गाँव की पगडंडियों पर घुंघरुओं की झंकार और बैलगाड़ियों की कतारें सज जाती हैं। आज भले ही ट्रैक्टर, गाड़ियाँ और बसें चलने लगी हों, पर मेले का उत्साह वही सैकड़ों साल पुराना है!"

"मेले में सिर्फ हमारे जिले के रानीगंज, पट्टी, लालगंज, कुंडा और बेल्हा शहर के लोग ही नहीं आते... बल्कि जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी और प्रयागराज (इलाहाबाद) के सीमावर्ती गाँवों से हजारों लोग झुंड बनाकर पहुँचते हैं। ब्याही हुई बेटियाँ इस मेले के बहाने अपने मायके आती हैं। बिछड़े हुए रिश्तेदार, समधी-समधिन और यार-दोस्त इन्हीं मैदानों और दुकानों पर एक-दूसरे से गले मिलते हैं। यह मेला सिर्फ हाट-बाजार नहीं, बल्कि हमारे दिलों को जोड़ने वाला महापर्व है!"

मेला परिसर की खुली भूमि Mela Ground Open Area Ajgara अजगरा धाम का विस्तृत परिक्रमा पथ Parikrama Path Ajgara Pratapgarh सरोवर के पास हरियाली और मेला छांव Lush Greenery at Lake Bank
👧 छोटी बच्ची:

"बाबा! मेले में खाने-पीने की क्या-क्या चीजें मिलती हैं? और झूले कैसे होते हैं?"

🍬 कड़ाहे में छनती जलेबियां, आसमानी झूले और खिलौनों का संसार

👴 बाबा हँसते हुए:

"लो भाई! अब आई असली मजे की बात। अजगरा के मेले में कदम रखते ही सबसे पहले तुम्हारी नाक में खौलते हुए शुद्ध देशी घी और गन्ने के ताजे शीरे की सोंधी महक टकराएगी। हलवाई के बड़े-बड़े पीतल के कड़ाहों में जब करारी-कुरकुरी जलेबियां छनती हैं, तो मुँह में पानी आ जाता है।"

"और यहाँ की सबसे खास चीज है—देशी गुड़ की गुड़ही जलेबी! जो स्वाद अजगरा की गुड़ही जलेबी में है, वो किसी बड़े शहर की मिठाई में नहीं मिलेगा। इसके साथ गरमा-गरम खस्ता कचौड़ी और कुल्हड़ वाली तीखी-मसालेदार मटर चाट खा लो, तो मजा ही आ जाए! आसमानी चरखी, ड्रैगन झूला, मौत का कुआं, सर्कस, काठ की गाड़ियाँ और पीपीहरी वाली बांसुरियाँ बच्चों का मन मोह लेती हैं।"

मेला परिक्रमा पथ और सरोवर का छोर Walkway around Lake Ajgara सरोवर के शांत जल में प्रतिबिंबित आकाश Sky Reflection in Ajgara Lake तक्षक धाम तीर्थ का पावन घाट Sacred Ghat of Takshak Dhaam

🛕 तक्षक धाम और पावन सरोवर: आस्था व दीपदान का संगम

👴 बाबा श्रद्धा से हाथ जोड़ते हुए:

"मेले की सबसे बड़ी रूह है हमारा तक्षक धाम और यह पवित्र सरोवर! मेले में आने वाला हर श्रद्धालु पहले इस सरोवर के पवित्र जल से आचमन करता है, हाथ-मुँह धोता है और तक्षक धाम मंदिर में शीश नवाता है।"

"शाम ढलते ही जब सरोवर की सीढ़ियों पर सैकड़ों मिट्टी के दीये झिलमिलाने लगते हैं, तो ऐसा लगता है मानो आकाश के सारे तारे उतरकर जल में तैर रहे हों। लोग यहाँ मन्नतें मांगते हैं और अपने कुल-देवताओं को याद करते हैं। फिर जब सूरज लाल होकर डूबता है, तो हर कोई हाथ में जलेबी की पोटली और बच्चों के खिलौने लिए अपने-अपने गाँवों की ओर लौट पड़ता है।"

तक्षक धाम मुख्य मंदिर प्रांगण Takshak Dhaam Main Temple Courtyard सरोवर तट का आध्यात्मिक वातावरण Spiritual Ambience at Sarovar अजगरा धाम का पावन विहंगम दृश्य Holy Panoramic View of Ajgara Dhaam

🎥 साक्षात वीडियो दर्शन: यक्ष-युधिष्ठिर संवाद स्थल व 2018 अजगरा मेला

इन 21 दुर्लभ तस्वीरों की यात्रा के बाद अब अपनी आँखों से अजगरा के इस पावन संवाद स्थल और 2018 के ऐतिहासिक मेले की जीवंत हलचल को इन दोनों वीडियोज में साक्षात देखिए:

1. यक्ष-युधिष्ठिर संवाद स्थल व तक्षक धाम का पावन वीडियो दर्शन

2. 2018 में अजगरा मेले का सजीव वीडियो (दुकानें, झूले व जनसैलाब)

🗺️ नक्शे पर अजगरा: बेल्हा (प्रतापगढ़) से अजगरा पहुँचने का पूरा मार्ग

घंटाघर बेल्हा प्रतापगढ़ से रानीगंज अजगरा पहुँचने के लिए नीचे दिए गए लाइव गूगल मैप की सहायता लें:

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: अजगरा का मशहूर मेला कब लगता है?

अजगरा का मुख्य ऐतिहासिक मेला हर साल अगहन (मार्गशीर्ष) महीने के तीसरे मंगलवार को लगता है। इसके अतिरिक्त मकर संक्रांति (खिचड़ी) के अवसर पर भी तीन दिवसीय विशाल मेला और अजगरा महोत्सव आयोजित होता है।

Q2: मेले में कैसे पहुँचें और निकटतम रेलवे स्टेशन कौन सा है?

अजगरा पहुँचने के लिए प्रतापगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन से जौनपुर-रायबरेली रोड होते हुए लालगंज मार्ग पर लगभग 16 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। यहाँ ऑटो, ई-रिक्शा और बसें आसानी से मिल जाती हैं।

Q3: अजगरा मेला किन चीजों के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है?

यह मेला महाभारत कालीन यक्ष-युधिष्ठिर संवाद स्थल व तक्षक धाम सरोवर दर्शन, शुद्ध देशी गुड़ की जलेबी, करारी कचौड़ी, घरेलू हस्तशिल्प और विशाल ग्रामीण जनसैलाब के लिए जाना जाता है।

Q4: क्या अजगरा में कोई ग्रामीण संग्रहालय भी है?

हाँ, अजगरा में देश का पहला ग्रामीण पुरातत्व संग्रहालय स्थापित किया गया था, जिसमें कवि डॉ. निर्झर प्रतापगढ़ी के प्रयासों से प्राचीन सिक्के, मूर्तियां और दुर्लभ ग्रामीण वस्तुएं संजोई गई थीं।

🌟 चौपाल की अंतिम सीख: धरोहर को सहेजने का संकल्प

"अब अलाव की राख ठंडी हो रही है बचवा, जाकर अपनी-अपनी रजाई में सो जाओ। लेकिन याद रखना, हमारा अजगरा का मेला केवल एक दिन का कौतुक नहीं है, बल्कि यह हमारे पुरखों का आशीर्वाद, 11 पुरवों का आपसी भाईचारा और महाभारत की अमर सीख है। जब तुम बड़े हो जाओ, तो इस मेले की शान और पवित्रता को हमेशा सहेज कर रखना!"

— दादाजी की चौपाल, प्रतापगढ़ HUB विशेष सचित्र संकलन

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