प्रतापगढ़ का नवजागरण: डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की एक विस्तृत और रोचक पड़ताल
उत्तर प्रदेश के हृदय में बसा प्रतापगढ़ जिला, जिसे माँ बेल्हा देवी की पवित्र भूमि और ऐतिहासिक आंवला नगरी के रूप में पूरे देश में जाना जाता है, दशकों तक एक बुनियादी और अत्यंत दर्दनाक त्रासदी से जूझता रहा। यहाँ जब भी कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ता, किसी गर्भवती महिला की स्थिति नाजुक होती, या सड़क पर कोई भयानक दुर्घटना घटती, तो डॉक्टरों के पास केवल एक ही शब्द होता था—'प्रयागराज (SRN अस्पताल) या लखनऊ (KGMU/SGPGI) रेफर कर दीजिए।' 60 से 150 किलोमीटर का वह सफर तय करते-करते अनगिनत सांसें एम्बुलेंस के सायरन और सई नदी के पुलों के बीच ही दम तोड़ देती थीं। प्रतापगढ़ के लोगों की आंखों में आंसू और बेबसी दशकों पुरानी कहानी बन चुकी थी।
लेकिन समय ने करवट ली और प्रतापगढ़ की इस पीड़ा का अंत करने के लिए एक अभूतपूर्व संकल्प का जन्म हुआ। आज वही प्रतापगढ़ न केवल अपनी स्वास्थ्य सीमाओं को लांघकर आत्मनिर्भर बन चुका है, बल्कि पूर्वांचल और अवध के संगम पर आधुनिक चिकित्सा शिक्षा का एक भव्य और चमकदार केंद्र बनकर उभरा है। इस युगांतकारी परिवर्तन का नाम है—'डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय' (Dr. Sone Lal Patel Autonomous State Medical College - ASMC Pratapgarh)। यह संस्थान केवल एक मेडिकल कॉलेज नहीं, बल्कि बेल्हा के लाखों नागरिकों के जीवन, सम्मान और सुनहरे भविष्य की सबसे मजबूत ढाल है।
एक सपने का जन्म: निर्माण, इतिहास और नामकरण की कहानी
किसी भी महान संस्थान की नींव में एक गहरा विचार और लंबा संघर्ष होता है। प्रतापगढ़ में एक पूर्ण सुसज्जित सरकारी मेडिकल कॉलेज का विचार वर्षों तक राजनीतिक बहसों और चुनावी वादों में उलझा रहा। लेकिन केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY)' के तहत देश के हर जिले में तृतीयक स्तर (Tertiary Care) के मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के मिशन ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रतापगढ़ को इस परियोजना के प्राथमिकता वाले चरण में शामिल किया।
25 अक्टूबर 2021 का दिन प्रतापगढ़ के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। इसी ऐतिहासिक दिन देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सिद्धार्थनगर से एक साथ उत्तर प्रदेश के 9 नए मेडिकल कॉलेजों का वर्चुअल लोकार्पण किया, जिसमें हमारा अपना प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज भी शामिल था। इस लोकार्पण के साथ ही जिले के लोगों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की सौगात मिली और सैकड़ों मेधावी छात्रों के डॉक्टर बनने के द्वार गृह जनपद में ही खुल गए।
इस संस्थान का नामकरण सामाजिक न्याय और पिछड़े-वंचित वर्गों की आवाज उठाने वाले प्रखर जननेता 'डॉ. सोनेलाल पटेल' की स्मृति में किया गया। डॉ. सोनेलाल पटेल ने अपना पूरा जीवन समाज के दबे-कुचले वर्गों के उत्थान, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए समर्पित कर दिया था। सरकार द्वारा इस मेडिकल कॉलेज का नाम उनके नाम पर रखना न केवल इस क्षेत्र की सामाजिक भावनाओं का गहरा सम्मान था, बल्कि यह संदेश भी था कि यह संस्थान बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहेगा।
भौगोलिक स्थिति और एक अत्याधुनिक परिसर (Campus) की वास्तुकला
यह मेडिकल कॉलेज प्रतापगढ़ शहर के एकदम मुख्य हिस्से में, 'प्योर केशव राय' इलाके में स्थित है। इसका स्थान इतना रणनीतिक है कि जिले के किसी भी कोने से यहाँ पहुँचना बेहद आसान है। भौगोलिक दृष्टि से:
- प्रतापगढ़ बस स्टैंड से इसकी दूरी मात्र 5 किलोमीटर है।
- प्रतापगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन से यह लगभग 5.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
- राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-31) और प्रयागराज-अयोध्या मुख्य मार्ग से जुड़े होने के कारण एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहनों को जाम का सामना नहीं करना पड़ता।
21 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस कॉलेज परिसर का निर्माण आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) तकनीकों का अनूठा संगम है। जब आप मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करते हैं, तो चौड़ी सड़कें, सुव्यवस्थित लॉन और लाल-सफेद ईंटों की फिनिशिंग वाली बहुमंजिला इमारतें आपका स्वागत करती हैं।
परिसर की वास्तुकला को चार मुख्य खंडों में विभाजित किया गया है: प्रशासनिक ब्लॉक, अकादमिक ब्लॉक, छात्रावास संकुल, और आवासीय परिसर। अकादमिक ब्लॉक में 4 विशाल और पूरी तरह वातानुकूलित (Air-Conditioned) लेक्चर थियेटर बनाए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक में 150 से अधिक छात्रों के बैठने की क्षमता है। ये थियेटर्स स्मार्ट डिजिटल पोडियम, अत्याधुनिक प्रोजेक्टर, ऑडियो-विजुअल सिस्टम और ध्वनिक इन्सुलेशन (Acoustic Insulation) से लैस हैं, जहाँ शिक्षक देश-विदेश के जटिलतम मेडिकल केसों को लाइव स्क्रीन पर समझाते हैं।
इसके अलावा, विभिन्न विभागों के लिए अलग-अलग अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं (Laboratories), एनाटॉमी डिसेक्शन हॉल (जहाँ छात्र मानव शरीर संरचना का गहन अध्ययन करते हैं), फिजियोलॉजी लैब, बायोकेमिस्ट्री लैब, पैथोलॉजी म्यूजियम और कम्युनिटी मेडिसिन रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं। कॉलेज की सेंट्रल लाइब्रेरी एक ज्ञान का खजाना है, जिसमें हजारों राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स, नवीनतम संदर्भ पुस्तकें, हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी वाली ई-लाइब्रेरी और छात्रों के लिए 24 घंटे खुला रहने वाला शांत रीडिंग रूम शामिल है।
राजा प्रताप बहादुर अस्पताल: उम्मीद और जीवन का नया केंद्र
एक उत्कृष्ट मेडिकल कॉलेज की असली पहचान उसकी किताबों से नहीं, बल्कि उससे जुड़े शिक्षण अस्पताल (Teaching Hospital) और उसके डॉक्टरों के सेवा-भाव से होती है। डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज का मुख्य संबद्ध अस्पताल है—'राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय' (Raja Pratap Bahadur Hospital)। कभी एक साधारण जिला अस्पताल के रूप में सीमित संसाधनों के साथ संचालित होने वाला यह परिसर, मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होते ही पूरी तरह कायाकल्प की प्रक्रिया से गुजर चुका है।
आज इस अस्पताल की चौखट पर कदम रखते ही यह अहसास होता है कि आप किसी महानगर के आधुनिक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में खड़े हैं। यहाँ रोजाना 2,000 से 2,500 से अधिक मरीज ओपीडी (OPD) में अपना इलाज कराने आते हैं।
अस्पताल की क्षमता और अत्याधुनिक प्रणाली
वर्तमान में इस अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए 336 से 500 बिस्तरों (Beds) की विशाल क्षमता उपलब्ध है। अस्पताल में 24 घंटे संचालित होने वाली अत्याधुनिक इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर यूनिट है, जहाँ गंभीर रूप से घायल या हार्ट अटैक, स्ट्रोक व जहर खाने जैसी आपात स्थितियों में आए मरीजों का फौरन इलाज शुरू किया जाता है। यहाँ आधुनिक आईसीयू (Intensive Care Unit), सीसीयू (Coronary Care Unit), एनआईसीयू (Neonatal ICU - नवजात शिशुओं के लिए गहन चिकित्सा इकाई) और पीआईसीयू (Pediatric ICU) पूरी तरह क्रियाशील हैं।
अस्पताल की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए डिजिटल ओपीडी पंजीकरण (HMIS प्रणाली) लागू की गई है, जिससे मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ता। इसके अलावा, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग में 24 घंटे सीटी स्कैन (CT Scan), डिजिटल एक्स-रे, अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड, रंगीन डॉपलर और स्वचालित बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर जैसी जीवनरक्षक जांचें बेहद नाममात्र सरकारी शुल्क पर उपलब्ध हैं।
आयुष्मान भारत योजना: गरीबों के लिए वरदान
इस अस्पताल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह 'आयुष्मान भारत (PM-JAY)' और उत्तर प्रदेश 'मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना' के तहत पूरी तरह सूचीबद्ध है। गरीब और असहाय परिवारों के लिए यह अस्पताल किसी मंदिर से कम नहीं है। कैंसर, न्यूरो, ऑर्थोपेडिक, और जटिल सर्जरी जैसी वे बीमारियां जिनका खर्च निजी अस्पतालों में 2 लाख से 5 लाख रुपये तक पहुंच जाता था, यहाँ आयुष्मान कार्ड के जरिए एक भी पैसा खर्च किए बिना, 100% कैशलेस और मुफ्त में की जा रही हैं। अस्पताल में विशेष 'आयुष्मान मित्र' डेस्क बनाई गई है जो मरीजों के कागजात तुरंत तैयार कर उन्हें बिना किसी बाधा के इलाज दिलाती है।
दलालों और बिचौलियों पर कड़ा प्रहार
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी अस्पतालों के बाहर कुछ दलाल या बिचौलिए घूमते रहते हैं जो सीधे-सादे ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर महंगे और गैर-मान्यता प्राप्त निजी नर्सिंग होम में ले जाते हैं। लेकिन डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने इस पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है। अस्पताल परिसर को पूरी तरह सीसीटीवी कैमरों के जाल से पाट दिया गया है। सुरक्षा गार्डों की 24 घंटे तैनाती है और समय-समय पर औचक छापेमारी की जाती है।
कॉलेज के प्राचार्य और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) स्वयं वार्डों में घूमकर मरीजों से पूछते हैं कि उनसे किसी दवा, जांच या ऑपरेशन के लिए किसी ने अवैध पैसे की मांग तो नहीं की। इस सख्त निगरानी और पारदर्शिता का नतीजा यह हुआ है कि बिचौलियों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया है और जनता का भरोसा सीधे सरकारी डॉक्टरों पर कायम हुआ है।
शिक्षा, दाखिला और मेधावियों का जमावड़ा: MBBS की पढ़ाई
डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज केवल मरीजों का इलाज नहीं कर रहा, बल्कि देश को भविष्य के संवेदनशील, कुशल और समर्पित डॉक्टर भी दे रहा है। यह कॉलेज भारत की सर्वोच्च चिकित्सा नियामक संस्था 'राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग' (National Medical Commission - NMC) द्वारा पूर्णतः मान्यता प्राप्त है और उत्तर प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा विश्वविद्यालय 'अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय (ABVMU), लखनऊ' से संबद्ध है।
एमबीबीएस (MBBS) में दाखिले की प्रक्रिया
यहाँ हर साल MBBS (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) की 100 सीटों पर छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। दाखिले की पूरी प्रक्रिया शत-प्रतिशत पारदर्शी और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली 'नीट' (NEET-UG) परीक्षा की मेरिट सूची पर आधारित होती है:
- 15% सीटें (ऑल इंडिया कोटा - AIQ): देश भर के किसी भी राज्य का मेधावी छात्र मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के माध्यम से इन 15 सीटों पर प्रवेश ले सकता है। यहाँ केरल, तमिलनाडु, राजस्थान, दिल्ली, बिहार और महाराष्ट्र तक के छात्र पढ़ रहे हैं, जिससे यह मिनी-भारत का रूप ले चुका है।
- 85% सीटें (राज्य कोटा - UP State Quota): उत्तर प्रदेश के मूल निवासी छात्र चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय (DGME, UP) की राज्य काउंसलिंग के माध्यम से इन 85 सीटों पर प्रवेश पाते हैं।
कट-ऑफ का गणित: यहाँ प्रवेश कितना कठिन है?
इस कॉलेज की बढ़ती हुई लोकप्रियता का अंदाजा यहाँ की कट-ऑफ (Cut-off) रैंकिंग से लगाया जा सकता है। देश भर के शीर्ष छात्र, जो कभी केवल पुराने मेडिकल कॉलेजों में जाना चाहते थे, अब प्रतापगढ़ के आधुनिक बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक माहौल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
नीचे दी गई तालिका में नीट (NEET) परीक्षा की विभिन्न श्रेणियों के आधार पर ऑल इंडिया कोटे (All India Quota - AIQ) की क्लोजिंग रैंक का तुलनात्मक विवरण दिया गया है:
| श्रेणी (Category) | नीट 2024 क्लोजिंग रैंक (All India) | नीट 2025 क्लोजिंग रैंक (All India) | नीट 2026 क्लोजिंग रैंक (All India) |
|---|---|---|---|
| जनरल (General / OPEN) | 13,294 | 14,577 | 14,011 |
| ओबीसी (OBC) | 14,220 | 15,429 | 16,032 |
| ईडब्ल्यूएस (EWS) | 13,965 | 16,768 | उपलब्ध नहीं |
| अनुसूचित जाति (SC) | 77,482 | 91,457 | 82,872 |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 1,09,229 | 109,057 | 105,380 |
फीस का ढांचा: गरीब का बच्चा भी बनेगा डॉक्टर
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस करने का खर्च आज करोड़ों रुपये तक पहुंच गया है, जो किसी भी सामान्य या मध्यमवर्गीय परिवार के बूते के बाहर है। लेकिन डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एक सरकारी संस्थान होने के कारण बेहद किफायती और नाममात्र शुल्क पर विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करता है:
- ट्यूशन फीस (Tuition Fee): सरकारी नियमों के अनुसार, यहाँ की सालाना ट्यूशन फीस लगभग 36,000 रुपये से 42,000 रुपये के बीच है।
- हॉस्टल फीस (Hostel Fee): रहने और खाने के लिए हॉस्टल का खर्च मात्र 10,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये सालाना के आसपास आता है।
- अन्य शुल्क: परीक्षा शुल्क, लाइब्रेरी, लैब और एकमुश्त सिक्योरिटी डिपॉजिट (जिसे बाद में वापस कर दिया जाता है) मिलाकर लगभग 10,000 रुपये अतिरिक्त होते हैं।
कुल मिलाकर प्रथम वर्ष का खर्च लगभग 60,000 से 65,000 रुपये आता है, और इसके बाद के वर्षों में यह खर्च घटकर 40,000 रुपये के करीब रह जाता है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली 'दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना' के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के छात्रों की पूरी फीस वापस भी हो जाती है।
उच्च शिक्षा की ओर कदम: पोस्ट ग्रेजुएट (PG) और DNB पाठ्यक्रम
किसी भी मेडिकल कॉलेज की परिपक्वता इस बात से आंकी जाती है कि वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों (Specialists) को तैयार करने के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) स्तर की पढ़ाई हो रही है या नहीं। ASMC प्रतापगढ़ ने अपनी स्थापना के बहुत ही कम समय में इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) और नीट-पीजी (NEET-PG) के माध्यम से यहाँ कई प्रमुख विभागों में विशेषज्ञता पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं:
- पैथोलॉजी (Pathology) में MD: रोग निदान और उन्नत परीक्षणों के लिए विशेषज्ञ रेजिडेंट डॉक्टरों की तैनाती।
- कम्युनिटी मेडिसिन (Community Medicine) में MD: सार्वजनिक स्वास्थ्य, महामारियों की रोकथाम और ग्रामीण स्वास्थ्य सर्वेक्षण।
- एनाटॉमी (Anatomy) में MD/MS: चिकित्सा अनुसंधान और मानव शरीर संरचना के उन्नत अध्ययन।
- जनरल मेडिसिन (General Medicine) में DNB: गंभीर और असाध्य रोगों के उपचार हेतु विशेषज्ञ चिकित्सक।
- बाल रोग (Pediatrics) में DNB: नवजात शिशुओं और बच्चों की गहन चिकित्सा देखभाल।
- प्रसूति एवं स्त्री रोग (Obstetrics & Gynaecology) में DNB: सुरक्षित प्रसव एवं जटिल महिला स्वास्थ्य प्रबंधन।
- निश्चेतना (Anaesthesia) में DNB: जटिल सर्जरी के दौरान आधुनिक एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर प्रबंधन।
इन पीजी और डीएनबी पाठ्यक्रमों के प्रारंभ होने से अस्पताल को 24 घंटे अस्पताल में उपस्थित रहने वाले समर्पित रेजिडेंट डॉक्टर उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे मरीजों को आपात स्थिति में तुरंत उच्चस्तरीय विशेषज्ञ परामर्श मिल रहा है।
हॉस्टल की दुनिया: किताबों से लेकर गिटार की धुनों तक
जब एक होनहार छात्र अपना घर छोड़कर इस मेडिकल कॉलेज में आता है, तो यहाँ का हॉस्टल ही उसका नया परिवार बन जाता है। मेडिकल की पढ़ाई देश की सबसे कठिन और तनावपूर्ण पढ़ाई मानी जाती है, जहाँ छात्रों को दिन-रात मोटी-मोटी किताबें पढ़नी पड़ती हैं और अस्पतालों में घंटों खड़े रहकर मरीजों की सेवा करनी होती है। ऐसे में हॉस्टल का माहौल छात्रों के मानसिक संतुलन और ऊर्जा का सबसे बड़ा आधार होता है।
लड़कों और लड़कियों के लिए 21 एकड़ के विशाल परिसर में बिल्कुल अलग-अलग हॉस्टल बनाए गए हैं। सुरक्षा का आलम यह है कि चौबीसों घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं, बायोमेट्रिक एंट्री होती है और पूरे हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। हॉस्टल के कमरे काफी हवादार और विशाल हैं, जहाँ छात्रों को व्यक्तिगत बेड, स्टडी टेबल, आरामदायक कुर्सी, अलमारी और बुकशेल्फ दिए गए हैं।
छात्रों के अनुभव (Student Reviews) से निकली सच्चाई: यहाँ के एक एमबीबीएस छात्र (बैच 2027) प्रियांशु के अनुसार—"प्रतापगढ़ जैसे ऐतिहासिक शहर में मेडिकल की पढ़ाई करना एक अनोखा अनुभव है। हमारा हॉस्टल परिसर बहुत शांत और हरा-भरा है। पढ़ाई के लिए यहाँ का वातावरण एकदम आदर्श है।"
मेस (Mess) का खाना औसत गुणवत्ता का है, लेकिन हॉस्टल की फीस (20,000 - 30,000 रुपये सालाना) को देखते हुए यह काफी किफायती माना जाता है। अनुशासन बनाए रखने के लिए लड़कियों के हॉस्टल के दरवाजे रात 10 बजे बंद कर दिए जाते हैं।
सर्दियों की रातों में जब पढ़ाई का दबाव बहुत अधिक होता है, तो छात्र हॉस्टल के बाहर अलाव (Bonfire) जलाकर बैठते हैं। कोई गिटार बजाता है, कोई चाय की चुस्कियों के साथ एनाटॉमी के मुश्किल सूत्र याद करता है, तो कोई अपने घर और माँ के हाथ के खाने को याद करके भावुक हो जाता है। यही वो लम्हे हैं जो इन युवा छात्रों को एक मजबूत, संवेदनशील और जीवनरक्षक डॉक्टर बनाते हैं। इसके अलावा, कॉलेज में हर साल आयोजित होने वाला वार्षिक उत्सव 'पिनाटा' (Piñata) छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय है, जिसमें क्रिकेट, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, संगीत, नृत्य और नाटकों की रंगारंग प्रतियोगिताएं होती हैं।
ऑपरेशन थियेटर के चमत्कार: वे घटनाएं जिन्होंने इतिहास रच दिया
यह मेडिकल कॉलेज सिर्फ कागजों पर चलने वाला संस्थान नहीं है; यहाँ के ऑपरेशन थियेटर (OT) में डॉक्टरों की टीम ने ऐसे-ऐसे जटिल और ऐतिहासिक ऑपरेशन किए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं। इन सफल सर्जरी ने बेल्हा के लोगों का विश्वास हमेशा के लिए जीत लिया है:
दिसंबर 2023 की कड़कड़ाती ठंड में एक अत्यंत निर्धन बुजुर्ग मरीज, जो पिछले कई वर्षों से कूल्हे की हड्डी खराब होने के कारण बिस्तर पर असहाय पड़ा था, उसे परिजन यहाँ लेकर आए। प्राइवेट अस्पतालों में इस ऑपरेशन का खर्च ढाई से तीन लाख रुपये बताया गया था। मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक सर्जनों की टीम ने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आधुनिक मॉड्युलर बाइपोलर प्रोस्थेसिस तकनीक से मरीज का 100% मुफ्त टोटल हिप रिप्लेसमेंट (कूल्हा प्रत्यारोपण) सफलतापूर्वक किया। ऑपरेशन के 48 घंटे के भीतर वह मरीज अपने पैरों पर खड़ा होकर चलने लगा।
दिसंबर 2023 में ही प्रतापगढ़ के डॉक्टरों ने वह कर दिखाया जो पहले केवल लखनऊ के पीजीआई या मेदांता जैसे कॉर्पोरेट अस्पतालों में ही संभव माना जाता था। एक युवा मरीज के घुटने का लिगामेंट (ACL/PCL) खेल के दौरान पूरी तरह टूट गया था। डॉक्टरों ने बिना कोई बड़ा चीरा लगाए, अत्याधुनिक आर्थ्रोस्कोपिक एंडोस्कोप (दूरबीन तकनीक) के जरिए सूक्ष्म छिद्रों से मरीज के टूटे हुए लिगामेंट को दोबारा जोड़कर घुटने को पूर्णतः स्वस्थ कर दिया।
नवंबर 2023 में एक मरीज गंभीर दर्द और पीलिया (Obstructive Jaundice) से तड़पता हुआ आपातकालीन वार्ड में पहुंचा। जांच में पता चला कि पित्त की थैली से फिसलकर एक बड़ी पथरी कॉमन बाइल डक्ट (CBD) में फंस गई थी, जिससे संक्रमण फैलने और जान जाने का खतरा पैदा हो गया था। सर्जनों की विशेषज्ञ टीम ने अत्यधिक संवेदनशील और जटिल सर्जरी करके बिना किसी बड़े जोखिम के उस पथरी को सुरक्षित बाहर निकाला और मरीज को नया जीवनदान दिया।
अक्टूबर 2023 में एक सड़क दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी (Spine Fracture) टूटने से एक युवक पूरी तरह लकवाग्रस्त होने के कगार पर पहुंच गया था। निजी अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए थे। मेडिकल कॉलेज के न्यूरो एवं ऑर्थो-स्पाइन सर्जनों ने कई घंटों की मैराथन सर्जरी में टाइटेनियम पेडीकल स्क्रू और रॉड्स के सहारे रीढ़ की टूटी कशेरुकाओं को स्थिर (Spinal Fixation) किया। आयुष्मान भारत योजना के तहत इस जटिल ऑपरेशन का सारा खर्च सरकार ने वहन किया और युवक आज बिना किसी सहारे के अपनी सामान्य दिनचर्या जी रहा है।
यहाँ के डॉक्टर और मेडिकल छात्र सिर्फ ऑपरेशन थियेटर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के नेतृत्व में मेडिकल कॉलेज की टीमें समय-समय पर प्रतापगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों—पट्टी, रानीगंज, कुंडा, लालगंज और कुहड़ा के गांवों—में जाकर मुफ्त स्वास्थ्य शिविर, टीबी उन्मूलन अभियान, रक्तदान शिविर और वेक्टर जनित बीमारियों (डेंगू/मलेरिया) के विरुद्ध व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाती हैं।
प्रमुख हस्तियों की डायरेक्ट्री: सटीक संपर्क सूत्र (Contact Directory)
इस मेडिकल कॉलेज की पारदर्शिता और सुशासन का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि यहाँ के प्रशासनिक अधिकारियों, विभागाध्यक्षों और आपातकालीन सहायता केंद्रों के संपर्क सूत्र आम जनता और छात्रों के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं:
प्रशासनिक अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष (Administration & HODs)
| पद (Designation) / विभाग | अधिकारी का नाम (Name) | संपर्क सूत्र / फोन नंबर (Contact Details) |
|---|---|---|
| प्राचार्य / डीन (Principal/Dean) | डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव (Dr. Salil Kumar Srivastava) | 05342-299013, 9415136663 |
| मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) | डॉ. सौभाग्य प्रकाश (Dr. Saubhagya Prakash) | अस्पताल आपातकालीन सेवा (05342-220555) |
| CMS (मातृ एवं शिशु विंग - MCH) | डॉ. रीना प्रसाद (Dr. Reena Prasad) | महिला अस्पताल संपर्क डेस्क |
| विभागाध्यक्ष, एनाटॉमी (HOD, Anatomy) | डॉ. सरोज कुमार (Dr. Saroj Kumar) | 05342-299013 (कॉलेज रिसेप्शन) |
| एसोसिएट प्रोफेसर, एनाटॉमी | डॉ. सादिक वदूद सिद्दीकी (Dr. Sadiq Wadood Siddiqui) | 7599188165 (drsadiqsiddiqui@gmail.com) |
| विभागाध्यक्ष, कम्युनिटी मेडिसिन | डॉ. सोमनाथ (Dr. Somnath) | 05342-299013 (कॉलेज रिसेप्शन) |
| विभागाध्यक्ष, बायोकेमिस्ट्री | डॉ. मोना (Dr. Mona) | 05342-299013 (कॉलेज रिसेप्शन) |
| एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी | डॉ. लवलीन (Dr. Lovleena) | 05342-299013 (कॉलेज रिसेप्शन) |
| एसोसिएट प्रोफेसर, पैथोलॉजी | डॉ. क्षमा तिवारी (Dr. Kshama Tiwari) | 05342-299013 (कॉलेज रिसेप्शन) |
| एसोसिएट प्रोफेसर, जनरल मेडिसिन | डॉ. मनोज खत्री (Dr. Manoj Khatri) | 05342-299013 (कॉलेज रिसेप्शन) |
महत्वपूर्ण जन-हेल्पलाइन नंबर (Emergency & Public Helplines)
| सुविधा का नाम (Service / Facility) | नंबर / ईमेल (Contact Details) |
|---|---|
| मेडिकल कॉलेज टेलीफोन / मुख्य रिसेप्शन | 05342-299013 |
| कॉलेज की आधिकारिक ईमेल आईडी | dslpasmcpratapgarh@gmail.com asmcprincipalpratapgarh@gmail.com |
| राजा प्रताप बहादुर अस्पताल (OPD / पूछताछ) | 05342-220555 |
| मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), प्रतापगढ़ | 05342-220507, 9721833111, 9415216504, 6386685822 (ईमेल: cmopr@up.nic.in) |
| सरकारी जिला ब्लड बैंक (Government Blood Bank, UP) | मोबाइल: 9415486482 (पिन - 230001) |
जीवनरक्षक प्रणालियां: ऑक्सीजन प्लांट और इन्फ्रास्ट्रक्चर
कोविड-19 महामारी ने पूरे देश को ऑक्सीजन की अहमियत समझा दी थी। इस सबक को ध्यान में रखते हुए, डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज को भविष्य की किसी भी चिकित्सा आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह 'ऑक्सीजन आत्मनिर्भर' बनाया गया है।
निष्कर्ष: उम्मीद की एक नई सुबह का प्रतीक
डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (ASMC प्रतापगढ़) आज केवल ईंटों से बनी एक सरकारी इमारत नहीं रह गया है; यह प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर और सुल्तानपुर सहित आस-पास के कई जिलों के लाखों लोगों के लिए जीवनदान का पर्याय बन चुका है।
पहले जहाँ लोग किसी भी बड़ी बीमारी के डर से अपना खेत और घर बेचकर प्रयागराज (SRN अस्पताल) या लखनऊ (KGMU/PGI) की ओर भागने को मजबूर थे, आज वही लोग अपने ही शहर में गर्व से सिर उठाकर कहते हैं—"हमारे प्रतापगढ़ में भी अब एम्स जैसा अस्पताल और मेडिकल कॉलेज है।"
दूसरी ओर, शिक्षा के क्षेत्र में यह संस्थान देश के शीर्ष 1% मेधावी छात्रों को आकर्षित कर रहा है। आने वाले वर्षों में जब यहाँ से पढ़कर निकले युवा डॉक्टर देश और दुनिया में सेवा देंगे, तो उनके नाम के साथ माँ बेल्हा देवी की यह पावन माटी भी हमेशा जुड़ी रहेगी।
यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य प्रतापगढ़ में उत्कृष्ट, पारदर्शी और अत्यंत किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की तलाश में है, तो डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज एवं राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय आज हर नागरिक का सबसे विश्वसनीय साथी है। यह संस्थान वास्तव में प्रतापगढ़ के नवजागरण और स्वस्थ भारत के सुनहरे कल का सजीव प्रतीक है।