रूप नाथ सिंह यादव: जीवन परिचय, स्वतंत्रता संग्राम से संसद तक का सफर, 1977 की ऐतिहासिक विजय व सामाजिक योगदान
भारत छोड़ो आंदोलन के सेनानी, 6वीं लोकसभा में प्रतापगढ़ के सांसद (1977-1979), उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और देश में सामाजिक न्याय व मंडल आयोग की आधारशिला रखने वाले नेता रूप नाथ सिंह यादव का संपूर्ण जीवन वृत्त।
रूप नाथ सिंह यादव भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक समर्पित योद्धा, प्रखर विधिवेत्ता और जनसरोकारों से जुड़े दूरदर्शी राजनेता थे। 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए वे जेल गए। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने प्रतापगढ़ की कचहरी में वकालत प्रारंभ की, जिसे बाद में जनसेवा के लिए त्याग दिया।
वे प्रतापगढ़ के बीरापुर विधानसभा क्षेत्र से दो बार (1967 और 1969) विधायक चुने गए और चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में कृषि उपमंत्री तथा स्थानीय स्वायत्त शासन (LSG) के कैबिनेट मंत्री रहे। वर्ष 1977 के ऐतिहासिक चुनाव में उन्होंने प्रतापगढ़ संसदीय सीट से 1,10,381 मतों के प्रचंड अंतर से तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राजा दिनेश सिंह को पराजित कर कीर्तिमान स्थापित किया। संसद में उन्होंने 'भारतीय सामाजिक विषमता उन्मूलन विधेयक, 1979' पेश किया, जिसने आगे चलकर मंडल आयोग (पिछड़ा वर्ग आयोग) के गठन में निर्णायक भूमिका निभाई।
📋 व्यक्तिगत एवं राजनीतिक विवरण (Personal & Political Profile)
| विषय (Particulars) | विवरण (Information) |
|---|---|
| पूरा नाम | रूप नाथ सिंह यादव (Roop Nath Singh Yadav) |
| जन्म वर्ष एवं स्थान | 1918 | जनपद प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) |
| देहावसान तिथि | 13 फरवरी 2001 (आयु 83 वर्ष) | इलाहाबाद (प्रयागराज) |
| स्वतंत्रता सेनानी पृष्ठभूमि | 1942 भारत छोड़ो आंदोलन में ब्रिटिश हुकूमत द्वारा गिरफ्तारी एवं कारावास |
| संसदीय कार्यकाल | सांसद, 6वीं लोकसभा (प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र - 1977 से 1979/80) |
| उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री |
• कैबिनेट मंत्री: स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग (1969-1970) • उपमंत्री: कृषि विभाग (1967-1968) |
| विधानसभा सदस्यता (MLA) | बीरापुर विधानसभा क्षेत्र (प्रतापगढ़) से 2 बार विधायक (1967 एवं 1969) |
| संसदीय समितियां | संसदीय वेतन व भत्ता संयुक्त समिति के सदस्य, मंडल आयोग के उत्तर प्रदेश सह-सदस्य |
| पेशा | अधिवक्ता (वकालत), किसान व सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता |
🛡️ स्वतंत्रता संग्राम: 1942 भारत छोड़ो आंदोलन व कारावास
युवावस्था में ही रूप नाथ सिंह यादव देश को औपनिवेशिक पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराने के संकल्प के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। जब 1942 में महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का आह्वान कर भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा की, तब प्रतापगढ़ में उन्होंने जनसमूह का नेतृत्व किया।
✊ ब्रिटिश दमन के विरुद्ध अडिग संघर्ष
अंग्रेजी हुकूमत के विरोध के चलते उन्हें गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया। जेल में असहनीय यातनाएं सहने के बावजूद उन्होंने कभी झुकना स्वीकार नहीं किया।
आजादी के बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विधि की शिक्षा ग्रहण कर वकालत शुरू की। वे हमेशा जरूरतमंदों और गरीबों को बिना किसी शुल्क के कानूनी सहायता उपलब्ध कराते थे।
🏛️ बीरापुर से दो बार विधायक व चौधरी चरण सिंह मंत्रिमंडल में दायित्व
1960 के दशक में उत्तर प्रदेश में किसानों और गैर-कांग्रेसी राजनीति के महानायक चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में रूप नाथ सिंह यादव ने राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी अमिट छाप छोड़ी:
| वर्ष | सदन / सीट | पद / दायित्व | महत्वपूर्ण उपलब्धि व कार्य |
|---|---|---|---|
| 1967 | विधानसभा (बीरापुर) | विधायक एवं कृषि उपमंत्री | प्रथम बार विधायक चुने गए; चौधरी चरण सिंह सरकार में किसानों के लिए कृषि योजनाओं को धरातल पर उतारा |
| 1969 | विधानसभा (बीरापुर) | विधायक एवं कैबिनेट मंत्री | पुनः बीरापुर से भारी मतों से विजयी होकर स्थानीय स्वायत्त शासन (LSG) के कैबिनेट मंत्री बने |
| 1977 | 6वीं लोकसभा (प्रतापगढ़) | सांसद (Member of Parliament) | भारतीय लोक दल / जनता पार्टी से 1.10 लाख से अधिक वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की |
🗳️ 1977 का ऐतिहासिक लोकसभा चुनाव: 1.10 लाख मतों से प्रचंड जीत
1975-77 के आपातकाल (Emergency) के बाद हुए ऐतिहासिक लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र में एक अभूतपूर्व राजनीतिक उलटफेर हुआ। भारतीय लोक दल (जनता पार्टी) के प्रत्याशी के रूप में रूप नाथ सिंह यादव का मुकाबला तत्कालीन केंद्रीय विदेश मंत्री और कालाकांकर राजघराने के राजा दिनेश सिंह से हुआ:
| प्रत्याशी का नाम | राजनीतिक दल | प्राप्त कुल मत | परिणाम / अंतर |
|---|---|---|---|
| रूप नाथ सिंह यादव (विजयी) | भारतीय लोक दल (BLD / जनता पार्टी) | 2,06,339 | +1,10,381 (विजयी) |
| राजा दिनेश सिंह | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | 95,958 | उपविजेता |
*इस प्रचंड जीत ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी। राजा दिनेश सिंह जैसे कद्दावर केंद्रीय मंत्री को 1 लाख 10 हजार से अधिक मतों से पराजित करना लोकतंत्र की जनशक्ति का अद्भुत प्रतीक बना।
⚖️ संसद में ऐतिहासिक 'सामाजिक विषमता उन्मूलन विधेयक, 1979' व मंडल आयोग
सांसद के रूप में रूप नाथ सिंह यादव ने देश के सामाजिक न्याय के इतिहास में एक मील का पत्थर स्थापित किया। 1979 में उन्होंने लोकसभा में एक गैर-सरकारी विधेयक (Private Member's Bill) पेश किया:
📌 The Indian Social Disparity Removal Bill, 1979
इस विधेयक के माध्यम से उन्होंने देश में जातिगत भेदभाव, सामाजिक गैर-बराबरी और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व के अभाव पर संसद में गहन बहस छेड़ी।
इस विधेयक पर हुई व्यापक चर्चा ने केंद्र सरकार को अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग आयोग (मंडल आयोग - Mandal Commission) के गठन के लिए प्रेरित किया। रूप नाथ सिंह यादव को उत्तर प्रदेश के लिए इस ऐतिहासिक आयोग का सह-सदस्य (Co-opted Member) बनाया गया था।
🕊️ बाद का राजनीतिक जीवन, सादगी और अमर विरासत
1980 के दशक के मध्य (1985-86) में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की उपस्थिति में रूप नाथ सिंह यादव कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। उन्होंने इलाहाबाद जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) के अध्यक्ष के रूप में संगठन को नई मजबूती दी।
वे आजीवन गांधीवादी सादगी, ईमानदारी और निर्धनों के कल्याण के प्रति समर्पित रहे। 13 फरवरी 2001 को 83 वर्ष की आयु में इलाहाबाद (प्रयागराज) में उनका देहावसान हुआ। उनका संपूर्ण जीवन प्रतापगढ़ और उत्तर प्रदेश के सामाजिक व राजनीतिक इतिहास में एक आदर्श मार्गदर्शक के रूप में सदैव याद किया जाएगा।
🗺️ प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र (उ.प्र.): लाइव लोकेशन मैप (Google Maps)
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. रूप नाथ सिंह यादव प्रतापगढ़ से कब सांसद चुने गए थे?
वे वर्ष 1977 के 6वीं लोकसभा चुनाव में भारतीय लोक दल / जनता पार्टी के टिकट पर प्रतापगढ़ से सांसद चुने गए थे और 1979/80 तक लोकसभा सदस्य रहे।
Q2. 1977 के चुनाव में उन्होंने किसे और कितने अंतर से हराया था?
उन्होंने 2,06,339 मत प्राप्त कर कांग्रेस प्रत्याशी और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राजा दिनेश सिंह (95,958 मत) को 1,10,381 मतों के विशाल अंतर से पराजित किया था।
Q3. वे उत्तर प्रदेश सरकार में किन मंत्रालयों के मंत्री रहे?
चौधरी चरण सिंह मंत्रिमंडल में वे 1967 में कृषि उपमंत्री और 1969 में स्थानीय स्वायत्त शासन (LSG) के कैबिनेट मंत्री रहे।
Q4. स्वतंत्रता संग्राम में उनकी क्या भूमिका रही?
वे एक सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और ब्रिटिश हुकूमत द्वारा गिरफ्तार होकर जेल गए।
Q5. संसद में उनका सबसे ऐतिहासिक योगदान क्या माना जाता है?
उन्होंने 1979 में लोकसभा में 'The Indian Social Disparity Removal Bill, 1979' पेश किया, जिसकी बहस के फलस्वरूप मंडल आयोग (पिछड़ा वर्ग आयोग) का गठन हुआ। वे उत्तर प्रदेश के लिए इसके सह-सदस्य भी रहे।